महेंद्रगढ़। चार माह से बंद मांगलिक कार्यक्रम एवं शादी-विवाह 12 नवंबर से पुन: शुरू हो जाएंगे।
कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को भगवान विष्णु योग निद्रा से जाग जाएंगे यानी देव उठ जाएंगे। इस के साथ ही चातुर्मास भी समाप्त हो जायेगा। ज्योतिषाचार्य पंडित राहुल भारद्वाज गढ़ी ने बताया कि 12 नवंबर को देवउठनी एकादशी रहेगी। इसके साथ ही आज से चार माह से थमी शहनाई फिर से गूंजने लगेंगी और शादी-विवाह, मुंडन, गृहप्रवेश आदि सभी मांगलिक शुभ कार्य फिर शुरू हो जाएंगे। इस एकादशी को प्रबोधिनी या देवोत्थान एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। एकादशी के दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है और एकादशी का व्रत रखा जाता है। उन्होंने बताया कि ऐसा करने से भक्तों की सभी सभी मनोकामना पूरी होती हैं। अंत में वैकुंठ लोक की प्राप्ति होती है।
- इस दिन तुलसी विवाह का भी विधान है:-
इस दिन तुलसी विवाह का भी बहुत अधिक महत्व बताया गया है। इस एकादशी के दिन भगवान विष्णु के शालिग्राम स्वरूप का माता तुलसी के साथ विवाह कराया जाता है। मान्यता है कि तुलसी विवाह संपन्न करवाने से कन्यादान के समान फल की प्राप्ति होती है और मोक्ष के द्वार खुल जाते हैं। साथ ही तुलसी और शालिग्राम की कृपा से विवाह में आने वाली बाधाएं भी दूर होती हैं। शादीशुदा जीवन में भी खुशियां बनी रहती हैं। जिस किसी के कन्या न हो तो उसे तो तुलसी विवाह करके कन्या दान का पुण्य जरूर कमाना चाहिए।
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- यह हैं विवाह के शुभ मुहूर्त:
विवाह में शुभ मुहूर्त सबसे महत्वपूर्ण होता है। शुभ मुहूर्त में किया गया विवाह अखंड होता है और वैवाहिक जीवन हमेशा सुख, समृद्धि, संपन्नता और प्रेम से भरा रहता है और वैवाहिक जीवन में कभी कोई समस्या नहीं आती। इसलिए विवाह पंचांग अनुसार शुभ मुहूर्त में ही करना चाहिए। नवंबर माह की 12, 22, 23, 26, 27 तारीख तथा दिसंबर माह की 6, 7, 11, 14 को विवाह व मांगलिक कार्यक्रमों के लिए शुभ महुर्त रहेगा। इसके 15 दिसंबर से 14 जनवरी तक मलमास रहेगा। मलमास के दौरान शुभ कार्यों पर विराम रहेगा।