गांव मेघोत बींजा में पिछले एक माह से लोग डेंगू के कहर से परेशान हैं। स्वास्थ्य विभाग को मामले की जानकारी देने के बाद भी स्थिति में सुधार नहीं हो रहा है। अभी भी स्थिति गंभीर बनी हुई है।
ग्रामीणों के मुताबिक पहाड़ की तलहटी में होने के कारण गांव में डायरिया, मलेरिया और अन्य बीमारियों का प्रकोप रहता है। इलाज की व्यवस्था उपलब्ध नहीं होने के कारण मरीजों को नारनौल, नांगल चौधरी या कोटपूतली के अस्पतलाों की ओर रुख करना पड़ता है।
एक महीने से गांव में डेंगू का कहर है। हालात नाजुक होने पर 19 को रेफर कर दिया। जयपुर में जांच के दौरान 8 मरीजों को कन्फर्म डेंगू मिला।
रविवार को चार ग्रामीणों में डेंगू के लक्षण मिलने के बाद मरीजों की संख्या 79 पहुंच गई। फॉगिंग करवाने की मांग को लेकर आक्रोशित ग्रामीणों ने 12 नवंबर को बैठक की। शनिवार की देर शाम फॉगिंग की गई। अभी भी पेयजल टंकी और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर जलभराव है। जहां मच्छर पनपने के कारण डेंगू पर अंकुश नहीं लग रहा।
आम रास्तों के कीचड़ से बढ़ी परेशानी
रामलाल, कृष्ण कुमार, बाबूलाल, सोहनलाल आदि ग्रामीणों ने बताया कि निकासी व्यवस्था नहीं होने के कारण आम रास्तों में गंदा पानी एकत्रित हो गया। इसमें मच्छर पनपने के कारण ग्रामीणों को मलेरिया, डेंगू, डायरिया आदि संक्रमित बीमारियां अपनी चपेट में ले रही हैं। 10 दिन में नालियों की सफाई तथा गंदगी नहीं उठवाने पर रोष प्रदर्शन की रूपरेखा बनाई जाएगी।
वर्जन
एसएमओ डा. अरुण कालरा ने बताया कि मेघोत बींजा के ग्रामीणों में डेंगू के लक्षण मिले हैं। शनिवार को फॉगिंग करवा दी गई। अन्य सुविधाओं के लिए उच्चाधिकारियों को अवगत करवा दिया गया है।