नारनौल। जिले के खंड नारनौल की ग्राम पंचायत दौचाना का चयन राष्ट्रीय स्तर पर सुजल ग्राम संवाद के तीसरे संस्करण के लिए किया गया। इसी कड़ी में बुधवार को देश के विभिन्न राज्यों की चयनित ग्राम पंचायतों के साथ ऑनलाइन संवाद किया। जहां दौचाना ग्राम पंचायत ने पेयजल प्रबंधन के लिए अपना अनुभव साझा किया।
ग्राम पंचायत दौचाना ने राष्ट्रीय स्तर के अधिकारियों के समक्ष पेयजल व्यवस्था के सफल संचालन एवं रखरखाव से जुड़े अपने अनुभव साझा किए। इसका उद्देश्य पंचायतों के माध्यम से पेयजल योजनाओं का सफल संचालन है। यह कार्यक्रम राष्ट्रीय जल जीवन मिशन के तहत आयोजित किया गया।
अधीक्षक अभियंता एसपी जोशी ने बताया कि ग्राम पंचायत दौचाना का चयन इसलिए किया गया क्योंकि पंचायत ने सामुदायिक सहभागिता के साथ हर घर नल से जल योजना को सफलतापूर्वक लागू किया है। इसके साथ ही पेयजल गुणवत्ता की नियमित जांच और जल शुल्क की प्रभावी वसूली भी सुनिश्चित की जा रही है।
कार्यकारी अभियंता जितेंद्र हुड्डा ने कहा कि जिन ग्राम पंचायतों को पेयजल व्यवस्था सौंपी गई है, उन्हें जल शुल्क एकत्रित करने का पूर्ण अधिकार है और दौचाना पंचायत की ओर से नियमित जल बिल वसूली एक सराहनीय पहल है।
कार्यक्रम में स्टेट वाटर एंड सीवरेज मिशन के मिशन डायरेक्टर राजीव बातिश, जिला प्रशासन महेंद्रगढ़ से अतिरिक्त उपायुक्त तरुण कुमार, जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग परिमंडल नारनौल से अधीक्षक अभियंता एसपी जोशी, कार्यकारी अभियंता जितेंद्र हुड्डा, जिला सलाहकार मंगतूराम सरसवा, उपमंडल अभियंता जसबीर सिंह, जेई प्रवीण कुमार, बीआरसी इंद्रजीत व अशोक कुमार उपस्थित रहे।
राष्ट्रीय स्तर से पूछे गए 6 प्रश्न
सुजल ग्राम संवाद के दौरान राष्ट्रीय स्तर से छह प्रश्न पूछे गए। इनमें पेयजल गुणवत्ता जांच, जल बैठक, जल बिल संग्रह, जल अर्पण दिवस और जल सेवा आकलन जैसे विषय शामिल थे। ग्राम पंचायत के सरपंच एवं ग्राम जल एवं सीवरेज समिति के अध्यक्ष मूलचंद ने बताया कि पूरे प्रदेश से उनकी पंचायत का चयन होना सभी ग्रामीणों के लिए गर्व की बात है। उन्होंने बताया कि प्रत्येक घर से 100 रुपये प्रति जल कनेक्शन शुल्क लिया जाता है
जल सेवा आकलन 31 जनवरी तक
अतिरिक्त उपायुक्त तरुण कुमार ने कहा कि जल जीवन मिशन से पहले महेंद्रगढ़ में पेयजल की गंभीर समस्या थी जो अब पूरी तरह दूर हो चुकी है। जिले की सभी ग्राम जल एवं सीवरेज समितियां सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं। उन्होंने बताया कि जल अर्पण दिवस का लक्ष्य 15 फरवरी तक पूरा किया जाएगा जबकि जल सेवा आकलन का लक्ष्य 31 जनवरी तक निर्धारित किया गया है।