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डॉक्टरों की लापरवाही से स्टाफ नर्स की मौत, मेवात मेडिकल में हड़ताल

Wed, 17 May 2017 11:55 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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नूंह/महेंद्रगढ़। शहीद हसन खां मेवाती मेडिकल कॉलेज, नल्हड़, जिला नूंह में डॉक्टरों की लापरवाही से स्टाफ नर्स प्रमिला की प्रसव के दौरान मौत हो गई। प्रमिला के पति सेनिक भानू प्रकाश की शिकायत पर 4 डाक्टरों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।  वहीं, स्टाफ नर्स की मौत के विरोध में कर्मचारियों ने हड़ताल कर दी। हड़ता में स्टाफ नर्स, एलटी स्टाफ, वार्ड ब्यॉय, सुरक्षा विभाग, कुछ डॉक्टरों व अन्य विभागों के कर्मचारी शामिल रहे। कर्मचारियों ने प्रमिला के परिजनों को 2 करोड़ मुआवजा और बड़ी बेटी को समयानुसार नौकरी की मांग रखी है।
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गांव लावन-महेंद्रगढ़ निवासी सेना में कार्यरत भानू प्रकाश की पत्नी प्रमिला साढ़े चार साल से मेवात मेडिकल कॉलेज में डीसी रेट पर स्टाफ नर्स तैनात थीं। मंगलवार को उन्हें प्रसव पीड़ा शुरू हुई तो दोपहर बाद करीब 3 बजकर 35 मिनट पर डॉ. साधना व जूनियर डॉक्टर मुलायम ने परीक्षण कर उसे प्रसूति कक्ष में दाखिल कर दिया। इसी दौरान डाक्टर दिव्या मंगला ने भी नर्स को देखा और चली गईं। नर्स ने शाम के करीब 5 बजकर 10 मिनट पर एक बच्ची को जन्म दिया। बच्ची की हालत खराब बताकर एनआईसीयू में दाखिल कर दिया गया। तभी नर्स की हालत भी बिगड़ने लगी।

उसे तेजी से ब्लीडिंग होने लगी तो वहां तैनात स्टाफ ने डाक्टर दिव्या मंगला को  स्थिति से अवगत कराया तथा आकर चेक करने के लिए कहा। लेकिन डाक्टर दिव्या मंगला ने यह कहकर मना कर दिया कि वह कहीं बाहर गई हुई हैं। आरोप है कि उक्त चिकित्सक उस समय मेडिकल कालेज के परिसर के स्पोर्ट्स कांप्लेक्स में चल रही योगा क्लास में मौजूद थीं। इसके बाद गायनी विभाग के एचओडी डा. एसपी सिंह को फोन पर स्थिति बताकर आने के लिए कहा गया। लेकिन उन्होंने कह दिया कि वे गुड़गांव में हैं। इसके बाद वहां तैनात स्टाफ व अन्य कर्मचारी इक्कट्ठे हो गए और नर्स को रक्त मुहैया कराने आदि व्यवस्थाओं में लग गए। जब नर्स की हालत ज्यादा बिगड़ गई गई तो करीब एक घंटे बाद डाक्टर महासिंह (बच्चों के डाक्टर) तथा डाक्टर रीना ने स्थिति को संभालने का प्रयास किया। करीब साढ़े सात बजे डाक्टर एसपी सिंह व डाक्टर दिव्या मंगला आए लेकिन तब तक नर्स दम तोड़ चुकी थी।
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प्रशासन ने नहीं ली सुध
इस सारी घटना के बाद अस्पताल व जिला प्रशासन को सूचित किया गया, लेकिन किसी ने कोई सुध नहीं ली। जिससे वहां मौजूद कर्मचारी आक्त्रसेशित हो गए और देर रात अस्पताल की आपातकालीन सेवाओं को छोड़कर बाकी काम का बहिष्कार कर हड़ताल शुरू कर दी। रात के करीब 1 बजे अधिकारी हड़ताल पर बैठे कर्मचारियों के पास पहुंचे तो लेकिन कोई ठोस आश्वासन नहीं दे पाए।

मंत्री आएंगे तो शुरू होगा काम
कॉट्रेक्च्युल एंप्लोई एसोसिएशन मेडिकल कॉलेज नल्हड़ के प्रधान ओमबीर कादियान, मेडिकल कालेज नल्हड़ की नर्स एसोसिएशन के प्रधान कमल कुमार के साथ सभी कर्मचारियों ने कहा कि जब तक स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज स्वयं आकर कालेज में कार्यरत कर्मचारियों के हितों के लिए एवं प्रमिला स्टाफ नर्स के परिजनों को न्याय दिलाने के लिए ठोस आश्वासन नहीं देते तब तक काम शुरू नहीं किया जाएगा।

ये हैं मांगें
कर्मचारियों ने मांग की कि दोषी चिकित्सकों के खिलाफ कड़ी कार्यवाई की जाए। प्रमिला स्टाफ नर्स के परिवार को दो करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता दी जाए। प्रमिला की बड़ी बेटी व मंगलवार को जन्मी छोटी बेटी की परवरिश तथा बड़ी बेटी को समयानुसार नौकरी दी जाए। सभी कर्मचारियों को चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल में कार्यरत अधिकारियों एवं डाक्टरों की तरह रिस्क अलाउंस, मेवात एरिया अलाउंस दिया जाए।

  सारे मामले की जानकारी उच्चाधिकारियों को दे दी गई है। वहीं मामले को निपटाने के लिए नूंह के एसडीएम डॉ. मनोज कुमार लगातार प्रयासरत हैं। उम्मीद है कि जल्द मामले का समाधान निकल जाएगा।
 डॉ. संसारचंद शर्मा,  निदेशक मेडिकल कॉलेज

चार डाक्टरों के खिलाफ मुकदमा दर्ज
नूंह। इलाज में लापरवाही के कारण मेडिकल कॉलेज की स्टाफ नर्स प्रमिला की मौत मामले में 4 डाक्टरों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। आईपीसी की धारा 304ए के तहत दर्ज मुकदमे में हालांकि अभी किसी भी आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया गया है। मृतक स्टाफ नर्स प्रमिला के पति भानुप्रकाश पुत्र गणपतराम निवासी लावन जिला महेंद्रगढ़ ने नल्हड़ चौकी पुलिस को शिकायत दी कि मंगलवार को उसकी पत्नी प्रमिला का मेडिकल कॉलेज नल्हड़ में प्रसव हुआ। प्रसव के बाद उसे ब्लीडिंग शुरू हो गई। डॉक्टरों को फोन कर बुलाया गया, लेकिन कुछ मेडिकल कॉलेज में ही होने के बावजूद अपनी ड्यूटी पर नहीं पहुंचे। जिसके कारण उसकी पत्नी की मौत हो गई। पुलिस ने उनके बयान पर मेडिकल कालेज के स्त्रीरोग विभाग के एचओड़ी डाक्टर एसपी सिंह, वरिष्ठ महिला चिकित्सक डाक्टर दिव्या मंगला, डॉक्टर साधना तथा जूनियर रेजीडेंट डॉक्टर मुलायम के खिलाफ लापरवाही से हुई मौत का मुकदमा दर्ज किया है।
 हड़ताल पर बैठे कर्मचारियों ने कहा कि पुलिस आरोपी डाक्टरों को बचाने का प्रयास कर रही है। डाक्टर खुलेआम मेडिकल कॉलेज में घूम रहे हैं और उन्हें गिरफ्तार नहीं किया जा रहा है। जिससे वे सबूतों को खुर्द-बुर्द कर सकते हैं। उन्होंने मांग की कि सभी डाक्टरों को तुरंत गिरफ्तार किया जाए। वहीं, नूंह थाना प्रभारी इंस्पेक्टर अशोक दहिया का कहना है कि अभी शव का पोस्टमार्टम भी नहीं हो पाया है। मामले की जांच की जा रही है, जल्द आरोपियों को गिरफ्तार किया जाएगा।

एसडीएम ने लगाई एक जान की कीमत 3 लाख रुपये
नूंह। हड़ताल पर बैठे कर्मचारियों को मनाने के लिए बुधवार की सुबह नूंह के एसडीएम डॉ. मनोज कुमार मेडिकल कॉलेज पहुंचे और कर्मचारियों को मनाने का प्रयास किया। कर्मचारियों ने उनके सामने मांग रखी कि मृतका के परिजनों को दो करोड़ रुपए का मुआवजा दिया जाए। इस पर एसडीएम ने उन्हें कहा कि इनका साढ़े तीन लाख रुपये का मुआवजा बनता है, जो सरकार द्वारा दे दिया जाएगा। उनके इस बयान से कर्मचारी भड़क गए और उन्होंने उनकी बात मानने से इनकार कर दिया। कर्मचारियों ने कहा कि मृतक प्रमिला का पति सेना में जवान है, जो देश की सेवा कर रहा है। वहीं मृतका प्रमिला स्वास्थ्य सेवा देकर लोगों की सेवा कर रही थी। ऐसे में एसडीएम ने देश के जवान व मृतका दोनों का अपमान किया है। उन्होंने एक जान की कीमत केवल साढ़े तीन लाख रुपए लगाई है। जो उन्हें अपमानित करना है। कर्मचारियों ने स्पष्ट कहा कि आगे से वे उनके मामले में दखल देने न आएं तो बेहतर रहेगा।
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