स्वास्थ्य विभाग रेवाड़ी की टीम ने मंगलवार रात डिकॉय पेशेंट के साथ महेंद्रगढ़ में श्रीकृष्णा अस्पताल पर छापा मारा। टीम ने चिकित्सक को रंगे हाथ एक महिला के गर्भ में भ्रूण के लिंग की जांच करते पकड़ा। पुलिस ने डॉक्टर समेत सात लोगों को गिरफ्तार किया है। डॉक्टर से टीम को रुपये बरामद नहीं हुए। टीम ने अस्पताल की दोनों अल्ट्रासाउंड मशीनों को सील कर दिया है।
पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ पीएनडीटी एक्ट के तहत मामला दर्ज कर अदालत में पेश किया। डॉक्टर और चालक को एक-एक दिन के रिमांड पर और बाकी पांच को 14 दिन के लिए न्यायिक हिरासत में भेजा है। इसी साल अस्पताल पर स्वास्थ्य विभाग ने दूसरी बार छापा मारा है।रेवाड़ी स्वास्थ्य विभाग ने शिकायत के आधार पर पुलिस के साथ मिलकर लिंग जांच करवाने वाले गिरोह को पकड़ने की प्लानिंग की। टीम ने एक लेडी कांस्टेबल को डिकॉय पेशेंट बनाकर दलाल के पास भेजा। लिंग जांच करवाने की सहमति जताने के बाद सीएमओ रेवाड़ी पुष्पा बिश्नोई ने एसपी रेवाड़ी के साथ मिलकर तीन टीमें बनाई।
मंगलवार को डिकॉय पेशेंट को हस्ताक्षर किए 17 हजार रुपये के नोट देकर भेजा। दलाल ने अपनी गाड़ी में ड्राइवर के साथ उसे भेज दिया। ड्राइवर जब डिकॉय पेशेंट को बैठाकर वहां से चला तो उसके पीछे रेवाड़ी पुलिस की दो गाड़ियां और उनके पीछे डॉक्टरों की टीम थी। गाड़ी रात 12:00 बजे महेंद्रगढ़ श्रीकृष्णा अस्पताल पहुंची। यह अस्पताल शिक्षामंत्री के निवास के सामने स्थित है। वहां टीमों ने छापामारी कर चिकित्सक को रंगेहाथ पकड़ा। पुलिस ने डा. सुनील, रूपेश, अनूप, अनिल, बिजेंद्र, ड्राइवर राजपाल और स्टाफ नर्स राजेश को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने डा. अशोक यादव के बयान पर आरोपियों के खिलाफ पीसी एंड पीएनडीटी एक्ट के तहत मामला दर्ज कर न्यायालय में पेश किया। अदालत ने आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया। टीम ने अस्पताल की दोनों मशीनों को सील कर दिया।
चार टीमों का किया गठन
अस्पताल पर छापा मारने के लिए चार टीमों का गठन किया। एक टीम स्वास्थ्य विभाग की थी जिसमें सीएमओ पुष्पा बिश्नोई, पीएनडीटी डिप्टी सीएमओ डा. सर्वजीत और डा. धर्मेंद्र शामिल थे। सात-सात पुलिस कर्मियों की दो टीमें, जिसका नेतृत्व डीएसपी पूजा डाबला कर रही थीं। एक टीम जिला स्वास्थ्य विभाग महेंद्रगढ़ से थी इनमें सीएमओ डा. राजपाल, डिप्टी सीएमओ अशोक यादव, डा. मनोज सोनी और महेंद्रगढ़ से डा. प्रदीप यादव शामिल थे। वहीं महेंद्रगढ़ पुलिस से डीएसपी ओमप्रकाश, एसएचओ मलखान सिंह तथा सिटी इंचार्ज सतबीर सिंह सहित अन्य पुलिस कर्मचारी मौजूद थे।
दो और पेशेंट पहुंची थी जांच को
डिकॉय पेंसेट के अलावा दो अन्य पेशेंट भी लिंग जांच के लिए पहुंची थीं। डिप्टी सीएमओ डा. सरवजीत ने बताया कि पहले भी एक पेशेंट लेटी थी। उनके पेशेंट को भी भीतर बुलाकर लेटा लिया। चिकित्सक ने किसी प्रकार कोई फार्म नहीं भर रखा था न ही रेफरल स्लिप थी। सीधी जांच शुरू कर दी। इसके बाद एक पेशेंट और जांच के लिए आई थीं। दोनों बाहर से आई पेशेंट ने भ्रूण लिंग जांच की बात को उनके सामने कबूला।
रेवाड़ी में लैब चलाता है दलाल रामू
पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीम ने 13 हजार रुपये बरामद किए हैं। इसमें से ड्राइवर राजपाल 10 हजार रुपये, नर्स राजेश से 3 हजार रुपये बरामद किए। वहीं नर्स राजेश ने बताया कि बाकी के 4 हजार रुपये रामू नाम के दलाल ने रख लिए, जोकि बरामद नहीं किए जा सके। राम रेवाड़ी में एक लैब चलाता है, वहीं राजेश रेवाड़ी के ही एक अस्पताल में स्टाफ नर्स के तौर पर कार्य कर रही है।
छह घंटे तक चला ऑपरेशन
रेवाड़ी उपायुक्त डा. यश गर्ग और एसपी बलवान सिंह राणा ने लघु सचिवालय में पत्रकारवार्ता में पूरे मामले की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जिन लोगों को गिरफ्तार किया गया है, उनमें महेंद्रगढ़ के अस्पताल के डा. सुनील कुमार यादव के अलावा लिसान निवासी रूपेश, माजरा खुर्द निवासी अनूप, पाटन निवासी अनिल, काकोड़िया निवासी बिजेंद्र, खेड़ी मोतला निवासी राजपाल और रेलवे कॉलोनी, रेवाड़ी निवासी स्टाफ नर्स राजेश शामिल हैं। अस्पताल में दो अल्ट्रासाउंड मशीन भी सील की हैं। मौके पर ही महेंद्रगढ़ सीएमओ और डीएसपी को बुलाया था। यह ऑपरेशन साढ़े छह घंटे तक चला। एसपी ने बताया कि इस पूरे मामले में कहीं भी मोबाइल का प्रयोग नहीं किया गया, सभी टीमों का संपर्क वॉकी-टॉकी पर हुआ।
18 हजार रुपये में हुआ था सौदा
एसपी के अनुसार भ्रूण लिंग जांच के 18 हजार रुपये में सौदा हुआ। इसमें 8000 रुपये डा. सुनील यादव को मिलते और बाकी अन्य सभी में बंटते। मौके पर अस्पताल में ड्राइवर राजपाल से 10 हजार रुपये भी बरामद हुए। इनमें आठ हजार रुपये वही थे, जिन पर डिप्टी सिविल सर्जन डा. सर्वजीत थापर ने हस्ताक्षर किए थे।
यूं पकड़ में आया गिरोह
स्वास्थ्य विभाग को चार-पांच दिन पहले सूचना मिली थी कि रेवाड़ी में कुछ लोग भ्रूण लिंग जांच के गोरखधंधे में लिप्त हैं और रेवाड़ी से ग्राहक बनाकर महेंद्रगढ़ में जांच करवाते हैं। विभाग की तफ्तीश में सबसे पहले तार निहाल अस्पताल की स्टाफ नर्स राजेश से जुड़े। टीम ने अपने इन्फॉर्मर को राजेश से संपर्क साधने को कहा। स्टाफ नर्स ने दावा किया कि 100 प्रतिशत रिजल्ट मिलेगा। इन्फॉमर्र से कहलवाया गया कि वह पहले भी जांच करा चुके हैं, लेकिन सही रिपोर्ट नहीं आई। संपर्क बनने के बाद जिस प्रकार नर्स ने निर्देशित किया उसी के अनुसार एक महिला पुलिस कांस्टेबल को डिकॉय पेशेंट बनाकर तय समय और स्थान पर भेजा गया।
वहां गाड़ी में सवार लोगों ने उसकी तलाशी ली कि उसके पास मोबाइल तो नहीं है। स्कूटर पर दो लोग और सवार थे, वे गाड़ी रवाना होते ही वहां से निकले। पुलिस ने भी पूरी प्लानिंग की और तीन टीमों को एक-एक गाड़ी दी और दो बाइक पर दो-दो पुलिसकर्मियों को भाड़ावास चौक पर नर्स के बताए स्थान पर भेजा। बोगस ग्राहक बनाकर भेजी कांस्टेबल को कुतुबपुर रेलवे फाटक के पास जो गाड़ी लेकर रवाना हुई, उसके पीछे पहले बाइक सवार पुलिसकर्मी ही थे। नाईवाली चौक से आगे कनीना रोड पर गाड़ी चढ़ते ही स्पीड बढ़ा दी तो बाइक सवार पीछे छूट गया। हालांकि पुलिस की दूसरी टीम ने सक्रियता दिखाते हुए अपनी गाड़ी दौड़ाई और महेंद्रगढ़ में अस्पताल तक उसके पीछे पहुंच गई। इसी गाड़ी में भ्रूण लिंग जांच के लिए काटकासिम राजस्थान की एक महिला भी बैठी थी।
ड्राइवर भी लंबे समय से संलिप्त
एसपी बलवान सिंह राणा ने बताया कि पूछताछ में ड्राइवर राजपाल ने बताया है कि वह रेवाड़ी से तीन-तीन महिलाओं को कई बार जांच के लिए ले जाता रहा है। पूरा गिरोह है, जो चेन सिस्टम के आधार पर काम कर रहा है। रेवाड़ी में कई दलाल हैं, उन्हें जल्द पकड़ा जाएगा। जिस समय अस्पताल में रेड की, उसी समय जांच के लिए भिवानी की एक महिला को और लाया गया जबकि एक और गाड़ी भी वहां आई लेकिन वह निकल गई।
28 नवंबर को ही खुली थी सील
सीएमओ डा. पुष्पा बिश्नोई ने बताया कि श्रीकृष्ण अस्पताल के डा. सुनील यादव पहले भी इस प्रकार भ्रूण लिंग जांच करते पकड़े जा चुके हैं। 28 नवंबर को ही उनकी अल्ट्रासाउंड मशीन की सील खोली गई है। कुछ दिन ही बीतें हैं उन्होंने दोबारा वही कार्य शुरू कर दिया।