चेक बाउंस मामले को लेकर पूर्व चिकित्सक रोहिताश्व यादव द्वारा डाली गई एक याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायाधीश संदीप चौहान की अदालत ने जितेंद्र सिंह निवासी बहरोड राजस्थान को एक साल की सजा के साथ-साथ 50 लाख रुपये का मुआवजा देने के आदेश जारी किए हैं।
अधिवक्ता प्रमोद ताखर ने बताया कि याचिकाकर्ता डा. रोहिताश्व यादव के पिता शिव प्रसाद यादव तथा जितेंद्र सिंह यादव नीमराना के रिको इंडस्ट्रीयल एरिया स्थित गणपति प्लाजा कंपनी में जमीन के हिस्सेदार थे। कंपनी से शिव प्रसाद ने अपना हिस्सा छोड़ते हुए जमीन की एवज में जितेंद्र सिंह से 27 लाख 75 हजार रुपये का चेक अपने बेटे रोहिताश्व के नाम पर लिया था।
15 मार्च 2010 को जितेंद्र सिंह द्वारा दिया गया यह चैक जब रोहिताश्व यादव ने नारनौल सिंडिकेट बैंक के अपने सेविंग एकाउंट में डाला तो जितेंद्र सिंह के खाते में पैसा ना होने की वजह से चैक बाउंस हो गया। चेक बाउंस होने पर डा. रोहिताश्व ने नारनौल के प्रथम श्रेणी ज्यूडीशियल मजिस्ट्रेट की अदालत में केस दायर किया।
अदालत ने जितेंद्र सिंह को पीओ भी घोषित कर दिया और पुलिस जितेंद्र को गिरफ्तार करके ले आई। अदालत से जमानत लेने के बाद काफी समय बाद आरोपी जितेंद्र सिंह ने बहरोड थाना में 18 जून 2014 को डा. रोहिताश्व यादव के ही खिलाफ चैक चोरी करने का मुकदमा दर्ज करवा दिया। बाद में जांच के बाद चेक चोरी का मुकदमा रद हो गया। दूसरी तरफ चेक बाउंस मामले की सुनवाई करते हुए नारनौल के प्रथम श्रेणी ज्यूडीशियल मजिस्ट्रेट संदीप चौहान ने जितेंद्र सिंह को एक साल की सजा तथा याचिकाकर्ता को 50 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिए है।