जेरपुर गांव में एक युवक की जहर पिलाकर उसकी जान ली गई। चुनावी रंजिश में कुछ लोगों ने इस घटना को अंजाम दिया था। मृतक युवक राहुल के परिजनों ने मंगलवार यह आरोप लगाया है। परिजनों ने एक डाक्टर से पोस्टमार्टम कराने का विरोध कर पुलिस पर भी आरोपियों से सांठगांठ करने का आरोप लगाया। अस्पताल परिसर में एसडीएम द्वारा डॉक्टरों के बोर्ड द्वारा पोस्टमार्टम करवाने और पुलिस की शिकायत लिखित में लेने के बाद परिजन माने। इससे पहले परिजन एसपी को मौके पर बुलाने पर अड़े थे। पुलिस ने इस मामले में अज्ञात के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर लिया है। परिजनों की नाराजगी के बाद इस मामले की जांच सीआईए को सौंपी गई है।
सोमवार को जेरपुर गांव में एक युवक का शव मिला था। उसकी पहचान गांव के ही राहुल के रूप में हुई थी। वह गांव की सरपंच प्रियंका का भतीजा भी था। पुलिस को उस समय दिक्कतों का सामना करना पड़ा, जब मंगलवार सुबह सरपंच के पति सुरेंद्र और पिता ओमप्रकाश के अलावा अन्य परिजनों ने पोस्टमार्टम करवाने से साफ इंकार कर दिया। इन लोगोें का कहना था कि अगर पुलिस ने जबरदस्ती पोस्टमार्टम करवाया तो शव नहीं लेंगे। इस तेवर से पुलिस के पसीने छूट गए। पुलिस प्रशासन द्वारा परिजनों को मनाने के प्रयास विफल रहे। हालांकि बाद में एसडीएम नारनौल को मौके पर बुलाया गया। उनको ज्ञापन देने के बाद ही परिजनों ने शव का पोस्टमार्टम करने दिया।
बोर्ड द्वारा करवाया गया पोस्टमार्टम
मंगलवार सुबह जब पुलिस ने पोस्टमार्टम करवाने की तैयारी शुरू की तो परिजनों ने साफ कहा कि वे किसी एक डॉक्टर से पोस्टमार्टम नहीं करवाएंगे। बोर्ड द्वारा पोस्टमार्टम करने पर ही वे अपनी सहमति देंगे। इस पर पुलिस ने तीन डॉक्टरों के बोर्ड से शव का पोस्टमार्टम करवाया। इसके अलावा पोस्टमार्टम की वीडियोग्राफी भी करवाई गई।
एसपी की थी डिमांड, एसडीएम पर माने
पोस्टमार्टम नहीं होने देने की बात को लेकर अड़े ग्रामीणों की मांग थी कि एसपी मनीषा चौधरी को मौके पर बुुलाया जाए। इसके बाद एसपी के बाहर होने का हवाला देकर एसडीएम नारनौल को ही मौके पर बुलाया गया। ग्रामीणों ने पुलिस कार्यशैली की एसडीएम को ज्ञापन सौंपकर शिकायत की। एसडीएम ने आश्वासन दिया कि वे उनकी बात एसपी तक पहुंचा देंगे।
पुलिस पर लगाया साक्ष्य मिटाने का आरोप
अस्पताल में हंगामा कर रहे मृतक के परिजनों ने आरोप लगाया कि पुलिस को सब पता है कि कौन आरोपी है? वहीं ग्रामीणों का कहना था कि पुलिस ने आरोपियों से सांठ-गांठ करके साक्ष्यों को मिटाने का काम किया है। पुलिस शुरुआत में डॉग स्क्वायड ही नहीं ला रही थी। कुत्तों को बीमार बताया जा रहा था लेकिन जब बाद में उन्होंने दबाव दिया तो कुत्ते लाए गए।
सीआईए स्टाफ करेगा मामले की जांच
ग्रामीणों द्वारा सतनाली थाना पुलिस पर आरोप लगाए जाने के बाद अब जांच सीआईए टीम को दे दी गई है। सीआईए की टीम ने जांच मिलते ही मौके का निरीक्षण भी किया। सीआईए टीम का कहना था कि अगर ग्रामीणों ने जांच में सहयोग किया तो जल्द ही आरोपी पुलिस की गिरफ्त में होंगे।