अमर उजाला ब्यूरो
महेंद्रगढ़।
मेघनवास चौक पर एक बाइक को बचाने के चक्कर में ऑटो और बाइक की टक्कर हो गई। इससे ऑटो अंनियंत्रित होकर पलट गया और चालक की मौत हो गई जबकि ऑटोे में सवार एक बुुजुर्ग महिला घायल हो गई। टक्कर लगने के बाद बवानिया निवासी ऑटो चालक रमेश मौके पर पड़ा रहा। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि मृतक दो घंटे तक तड़पता रहा न तो एंबुलेंस वहां पहुंची और न ही पुलिस। इससे गुस्साए बवानिया गांव के ग्रामीणों ने नेशनल हाईवे पर स्थित राव तुलाराम चौक पर आधे घंटे जाम लगाए रखा। परिजनों और ग्रामीणों ने 100 नंबर पर बैठने वाले कर्मचारी और थाना प्रभारी को सस्पेंड करने की मांग की। मौके पर पहुंचे डीएसपी सतेंद्र कुुमार ने उक्त कर्मचारियों पर कार्रवाई का ग्रामीणों को आश्वासन दिया। उसके बाद ही ग्रामीणों ने जाम खोला।
जानकारी के अनुसार गांव रमेश (40) निवासी बवानिया ऑटो चलाता था। सोमवार को वह महेंद्रगढ़ से बुजुर्ग महिला को लेकर बवानिया जा रहा था। मेघनवास चौक के पास सामने से आ रही बाइक से टक्कर हो गई। इससे ऑटो का संतुलन बिगड़ गया और वह पलट गया। इस हादसे में ऑटो चालक रमेश कुमार की मौत हो गई जबकि ऑटो के अंदर बैठी बुजुर्ग महिला दुलोठ अहीर निवासी लाली देवी घायल हो गई।
परिजनों का आरोप है कि समय पर एंबुलेंस नहीं पहुंचने पर घायल ने दम तोड़ दिया। इस बात को लेकर ग्रामीणों ने राव तुलाराम चौक पर शव को बीच सड़क पर रखकर जाम लगाया दिया। साथ ही 100 नंबर बैठने वाले कर्मचारी, थाना प्रभारी एवं एंबुुुलेंस कर्मचारी को संस्पेंड करने की मांग करने लगे। मौके पर पहुंचे डीएसपी सतेंद्र कुमार ने ग्रामीणों को आश्वासन दिया कि शिकायत वो लिखकर देंगे, उस पर पुलिस कार्रवाई करेगी। इसके बाद ग्रामीणों ने जाम खोल दिया। मृतक चार भाइयों में सबसे छोटा था। उसके एक लड़का एवं एक लड़की है। घायल लाली देवी एक निजी अस्पताल में उपचाराधीन है और बाइक सवार मौके से फरार हो गया। पुलिस ने मृतक रमेश के भाई श्रीचंद के बयान पर बाइक चालक के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है।
ये लगाए परिजनों ने आरोप
मृतक के भाई श्रीचंद ने बताया कि रमेश उसका सबसे छोटा भाई है। शनिवार को दोपहर करीब 1:20 बजे मेघनवास चौक पर सड़क हादसा हो गया। पांच मिनट बाद ही उन्होंने 100 नंबर और एंबुलेंस वालों के पास फोन किया था। 100 नंबर पर फोन करने के बाद वहां बैठे कर्मचारी ने कहा कि उनके पास कोई साधन नहीं है, साधन होंगा तभी कोई आएगा। उन्होंने बताया कि एक घंटे बाद एंबुलेंस वहां आई तो एंबुलेंस वाले ने कहा कि यह डैड हो चुका। वह इससे अस्पताल नहीं ले जा सकता है। हमने बताया कि रमेश के हाथ-पांव हिल रहे थे। परिजनों का कहना है कि अगर घायल को समय पर अस्पताल पहुंचा दिया जाता तो वह बच सकता था।
चार भाइयों में सबसे छोटा था रमेश
बता दें कि चार भाइयों में मृतक रमेश सबसे छोटा था। उसके माता-पिता की मौत पहले ही हो चुकी थी। दो वर्ष पहले चाचा की मौत हो गई थी और 9 महीने पहले कैंची मोड़ पर सड़क हादसे में भतीजे की मौत हो गई थी। मृतक की लड़की 12वीं कक्षा में और लड़का दसवीं कक्षा में पढ़ता है। अब घर में कमाने वाला कोई नहीं है।