अमर उजाला ब्यूरो
नारनौल। जिला में ओवरलोड रोकने के लिए बेशक प्रशासन ने जिला की सीमाओं पर सात नाके तैनात किए हुए हो। वहीं इन सात नाकों पर 63 लोगों का स्टाफ भी लगा दिया हो, इसके बावजूद जिला की सड़कों से ओवरलोड वाहनों का आवागमन अभी भी जारी है। अब जिला में मुख्य मार्गों की बजाय ओवरलोड ट्रक संचालक ग्रामीण अपरोच रास्तों का प्रयोग करने लग गए हैं। जिसके कारण ओवरलोड पर अंकुश लगाने में प्रशासन की मेहनत कामयाब नहीं हो पा रही है।
जिला महेंद्रगढ़ में खनन का काम होता है। जिला के साथ-साथ राजस्थान में भी क्रेशरों की संख्या अधिक है। वहीं कई पाहड़ियों में माइनिंग का काम होता है। जिसके कारण यहां पर ट्रक व डंपर चालक पत्थर व बजरी ओवरलोड भरकर ले जाते हैं। इससे कई बार हादसे भी होते रहते हैं। नारनौल से भरा गया ओवरलोड बजरी व पत्थर डंपर चालक रेवाड़ी होते हुए गुरुग्राम, दिल्ली व फरीदाबाद तक पहुंचाते हैं। प्रदेश सरकार द्वारा प्रदेश की सड़कों को ओवरलोड मुक्त करने के लिए हाल ही में एक नोटिफिकेशन जारी कर इन पर पूर्ण रूप से अंकुश लगाने के लिए जिला प्रशासन को कहा है। जिसके बाद जिला प्रशासन ने जिला का सर्वे करवा ओवरलोड पर अंकुश लगाने के लिए जिला में सात नाके निर्धारित किए। जिन पर 24 घंटे के लिए अधिकारियों व कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है।
- ये हैं जिला में लगे नाके
जिला में जिन सात स्थानों को प्रशासन ने चुनकर नाके लगाए, उनमें राजस्थान की सीमा के साथ लगते व क्रेशर जोन के इलाके शामिल हैं। इनमें नांगल चौधरी क्षेत्र में राजस्थान की सीमा के साथ लगता दौखेरा तथा बायल गांव पर ठंटर स्टेल लेवल की चेक पोस्ट बनाई गई है। इनके अलावा नांगल चौधरी के नजदीक जैनपुर मोड़, नारनौल-महेंद्रगढ़ रोड के बाईपास पर नांगतिहाड़ी, रेवाड़ी रोड पर नीरपुर चौक, महेंद्रगढ़ के आकोदा व जेरपुर में ये नाके लगाए गए हैं।
-सभी नाकों पर होगी वजन की जांच
जिन स्थानों पर नाके लगाए गए हैं, वहां पर वहां से गुजरने वाले सभी डंपरों व ट्रकों के वजन की जांच होगी। वजन के हिसाब से यदि कोई ओवरलोड पाया गया तो उसका ई चलान किया जाएगा। जिसको वाहन मालिक स्वयं भरेगा। यह काम नाकों पर 24 घंटे होगा तथा जिसके हिसाब से ड्यूटी बदल-बदल कर लगाई गई है।
-चोर रोडों से निकाल रहे ट्रक
जिला प्रशासन ने जो नाके लगाए हैं, वे सभी मुख्य मार्गों पर हैं। ऐसे में ट्रक व डंपर चालक अब चोर रास्तों, यानी गांव से निकलने वाले अपरोच रोडों का प्रयोग करने लग गए हख्नैं। जिसके कारण ग्रामीण क्षेत्र में ओवरलोड डंपरों व ट्रकों की संख्या ज्यादा दिखाई देने लग गई है।
-ये हैं अपरोच रोड
नारनौल में राजस्थान से आने के लिए सिंघाना रोड पर शिमला, दोचाना व भांखरी होते हुए। सिंघाना रोड से खटोटी मोड़ से राजस्थान की सीमा में, डोहर मोहनपुर होते, चिंडालिया, बापड़ोली होते हुए महेंद्रगढ़, सिहमा होते हुए कनीना, मंढाणा होते हुए बहरोड़ नांगल चौधरी के गांवों से बहरोड़ व रेवाड़ी जाने के लिए अनेक रास्ते हैं। जिनकी ओर प्रशासन ध्यान नहीं दे रहा।
-कितने माल होता है अंडर लोड
ट्रकों पर लगे टायरों की संख्या के हिसाब से ट्रकों की लोड क्षमता निर्धारित की जाती है। अगर उस हिसाब से ज्यादा वजन में माल भरा हो तो वह ओवरलोड कहलाता है। जैसे छह टायर ट्रक को 16.2 टन, दस टायर को 25 टन, 12 को 31 टन, 14 को 35.2 टन व 16 टायर ट्रक को 37 टन तक माल ले जाने की अनुमति होती है। इससे अधिक भार माल ले जाना ओवरलोड कहलाता है।
रविवार को भगा ले गए थे ट्रक
रविवार को चेक पोस्ट नांगल चौधरी के पास से दो ओवरलोड वाहन चालक अपने ट्रकों को भगा ले गए थे। जिसके बाद कस्बे के दुकानदारों ने उन ट्रकों को पकड़ा था।
आज होगी बैठक
जिला को ओवरलोड मुक्त बनाने के लिए उपायुक्त गरीमा मित्तल की अध्यक्षता में बुधवार 17 जनवरी को बैठक का आयोजन किया जाएगा। जिसमें ओवरलोड की समस्या से निजात के बारे में टीमों से जानकारी ली जाएगी।
जिले को ओवरलोड वाहनों से निजात दिलाने के लिए नाके लगाए गए हैं। जहां पर चेकिंग की जा रही है। फिर भी कहीं से ओवरलोड निकल जाता है तो उसका भी ध्यान रखा जाएगा तथा ओवरलोड वाहनों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। - कमलदीप गोयल, एसपी, नारनौल।