अमर उजाला ब्यूरो
महेंद्रगढ़। फाइनेंस कंपनी में 17 लाख रुपये की लूट को हल करने के लिए पुलिस अब मोबाइल डंप डाटा का सहारा लेगी। इसके लिए निजी कंपनियों की मोबाइल के टावर का रिकॉर्ड खंगाला जाएगा। पुलिस आरोपियों तक पहुंचने के लिए साइबर सैल की टीम का सहयोग लेगी।
भारत फाइनेंस कंपनी में 17 लाख 20 हजार 801 रुपये की लूट के मामले को हल करने के लिए पुलिस आदर्श कॉलोनी के आसपास एरिया में लगे मोबाइल टावर की पहचान कर रही है। इन सभी मोबाइल टावर का डंप डाटा एकत्र कर पुलिस संदिग्ध नंबरों की पहचान करेगी। मोबाइल डंप डाटा को खंगालने में पुलिस को कुछ समय लगेगा। इसमें सैकड़ों की संख्या में नंबर होते हैं। इस कारण संदिग्ध नंबरों की पहचान करने में कुछ वक्त लग सकता है। दो से तीन दिन का रिकॉर्ड लेकर पुलिस घटना के समय एक्टिवेट नंबरों से मिलान करेगी।
पुलिस दूसरी थ्योरी पर कंपनी के कर्मचारियों को संदेह के दायरे में लेकर काम कर रही है। जिसमें कंपनी के कर्मचारियों का रिकॉर्ड भी खंगाला जा रहा है। कर्मचारियों के मोबाइल नंबर की डिटेल से भी कुछ जानकारी जुटाने का प्रयास किया जा रहा है। सीसीटीवी से मिली फुुटेज में आरोपियों के चेहरे साफ नहीं है। इस कारण आरोपियों तक पहुंचने में कुछ दिक्कतें आ रही हैं।
क्या होता है मोबाइल डंप डाटा
किसी एरिया में लगे मोबाइल टावर का रिकॉर्ड लिया जाता है। उस टावर के एरिया में उस समय कितने फोन एक्टिवेट थे। इसकी पूरी जानकारी मिल जाती है। इस रिकॉर्ड को मोबाइल डंप कहा जाता है। इन नंबरों को जानने के बाद साइबर सैल ऐसे मोबाइल नंबरों की पहचान करेगी जो संबंधित एरिया में रहने वाले लोगों के नहीं हैं। ऐसे में अगर अपराधियों के पास मोबाइल था तो उसकी पहचान हो जाएगी।
वर्जन
लूट के केस को हल करने के लिए हमारी दो टीम काम कर रही हैं। दो अलग अलग थ्योरी पर जांच की जा रही है। हमें कुछ सुराग मिले हैं। तीसरी साइबर सैल की टीम अपने स्तर पर काम कर रही है। उम्मीद है कि जल्द ही इस मामले में सफलता मिलेगी।
- रूपलाल शर्मा, थाना प्रभारी, महेंद्रगढ़।