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Narnaul: जनस्वास्थ्य विभाग में फर्जी बिल बना 2.28 करोड़ का गबन, एसडीई-जेई समेत 17 पर केस दर्ज

Sat, 17 Dec 2022 10:10 PM IST
भूपेंद्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, नारनौल (हरियाणा)

सार

मुख्यमंत्री उड़नदस्ता रेवाड़ी को मामले की गुप्त सूचना मिली थी। उड़नदस्ते ने शहर थाने में मुकदमा दर्ज कराया है। नारनौल जनस्वास्थ्य विभाग में ठेकेदारों से मिलीभगत कर गबन करने का आरोप है।
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सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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हरियाणा के नारनौल में मुख्यमंत्री उड़नदस्ते ने जनस्वास्थ्य विभाग के उपमंडल अभियंता (एसडीई), कनिष्ठ अभियंता (जेई), अन्य कर्मचारियों व ठेकेदारों समेत 17 के खिलाफ गबन करने की शिकायत शहर थाने में दी है। पुलिस ने टीम की शिकायत पर विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है।

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आरोप है कि अधिकारियों ने पीने के पानी की पुरानी पाइप लाइन, वॉल्व, मोटर, स्टार्टर व केबल आदि की मरम्मत और पंप हाउस की सफाई के लिए फर्जी रिपोर्ट तैयार की और ठेकेदारों से मिलीभगत कर जाली बिल लगा 2 करोड़ 28 लाख 46 हजार 853 रुपये का गबन किया है। मामले में तीन एसडीई, 10 जेई और चार कॉन्ट्रेक्टर पर गबन का आरोप है।

बता दें कि मुख्यमंत्री उड़नदस्ता रेवाड़ी को गुप्त सूचना मिली थी कि जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग मंडल एक, दो और तीन नारनौल में विभाग के अधिकारियों द्वारा अनेक कार्यों की झूठी रिपोर्ट तैयार करके ठेकेदारों से मिलीभगत की और फर्जी फर्स्ट एंड फाइनल बिल तैयार करके करोड़ों का गबन किया गया है।
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इस पर उड़नदस्ते ने मामले की जांच करते हुए जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी मंडल एक, दो और तीन नारनौल से पत्राचार करके एक अप्रैल 2021 से 31 दिसंबर 2021 तक करवाए गए मरम्मत कार्यों की कोटेशन, टेंडरिंग व डीएनआईटी टेंडरिंग के तहत विभिन्न फर्म ठेकेदारों को उपमंडल 1, 2 और 3 मंडल एक नारनौल से किए गए भुगतान व बकाया राशि बिल व रिकॉर्ड प्राप्त किया।

जांच के दौरान उड़नदस्ते को जानकारी लगी कि कार्यकारी अभियंता विशेष परिस्थितियों में अपने स्तर पर केवल 50 हजार तक के सामान टेंडरिंग के माध्यम से खरीदने के लिए अधिकृत हैं, जबकि रिकॉर्ड के अनुसार इस अवधि के दौरान 2 करोड़ 28 लाख 46 हजार 853 रुपये का फर्जी बिल बनाकर मरम्मत का समान खरीदा गया। 

टीम ने अधिकारियों, ठेकेदारों से की पूछताछ
जांच के दौरान कुछ फर्म व ठेकेदारों के साथ जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी मंडल एक, दो और तीन के उपमंडल अधिकारी, नारनौल में तैनात कनिष्ठ अभियंता नितिन, प्रिय वीर, नरेंद्र पाल रंगा, राजीव, रोहित, संजीव, प्रवीण कुमार, एकता कुमारी, अनिल कुमार, अजीत कुमार और उपमंडल अभियंता मुकेश कुमार, रामपाल, अमित जैन और तत्कालीन कार्यकारी अभियंता जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग मंडल एक नारनौल को जांच में शामिल कर उनके बयान दर्ज किए गए। इसके अलावा कनिष्ठ अभियंता कार्यालय से स्टोर इंटेंड बुक व रजिस्टर की सत्यापित प्रतियां प्राप्त की गईं।

बिना बिल खरीदा दिखाया गया सामान
टीम ने मामले की जांच करते हुए पाया कि कोटेशन, टेंडरिंग व डीएनआईटी टेंडरिंग के तहत राजकुमार इंटरप्राइजेज, धर्मेंद्र कांट्रेक्टर, पंकज शर्मा कांट्रेक्टर और धीरज शर्मा कांटेक्ट ठेकेदारों से जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग मंडल एक, दो व तीन नारनौल के कनिष्ठ अभियंताओं नितिन, प्रिय वीर, नरेंद्र पाल रंगा, राजीव, रोहित, संजीव, प्रवीण कुमार, एकता कुमारी, अनिल कुमार, अजीत कुमार और उपमंडल अभियंता मुकेश कुमार, रामपाल, अमित जैन द्वारा मरम्मत आदि के लिए जो सामान खरीदा दिखाया गया था, उसके बिल प्राप्त नहीं किए गए।

मुख्यमंत्री उड़नदस्ते की शिकायत पर जनस्वास्थ्य विभाग के 17 अधिकारियों व ठेकेदारों पर गबन करने का मामला दर्ज किया गया है। इस मामले की जांच जा रही है। जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। -अश्वनी कुमार, प्रभारी शहर थाना नारनौल

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