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परिजनों ने सहपाठियों पर लगाया हत्या कर शव टैंक में डालने का आरोप

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फोटो नंबर 25
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सहपाठियों पर लगाया बच्चों की हत्या का आरोप
छह दिन पूर्व जनस्वास्थ्य विभाग के वाटर टैंक में मिले थे दो बच्चों के शव
अमर उजाला ब्यूरो
नारनौल। गांव कुतबापुर में जनस्वास्थ्य विभाग के वाटर टैंक में 6 दिन पूर्व मिले दो नाबालिग बच्चों के शव मामले में नया मोड़ आ गया है। ग्राम पंचायत कुतबापुर ने बच्चों की मौत पानी में डूबने से होने की बात को खारिज कर दिया। उन्होंने बच्चों के सहपाठियों पर रंजिश में हत्या कर शवों को वाटर टैंक में डालने का आरोप लगाया है। पंचायत के लोग शनिवार को पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपने पहुंचे थे।
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सरपंच प्रतिनिधि मनोज कुमार, महावीर सिंह, अशोक कुमार, रोहताश सिंह, रामसिंह, रामपत, छोटूराम, सुधीर कुमार, सुरेंद्र, लालचंद, नेतानंद, कंवर सिंह, बाबूलाल, धर्मवीर, राजेंद्र, राजकपूर, पूर्व सरपंच मुंशीराम आदि ग्रामीणों का कहना था कि इस मामले में पुलिस पीड़ित परिवार की मदद न कर आरोपियों को बचाने में लगी हुई है। ऐसे में उन्हें एसपी से ही न्याय की उम्मीद है। इसके चलते वे अपनी फरियाद लेकर शनिवार को एसपी कार्यालय पहुंचे। कई घंटे इंतजार करने के बाद शाम 5.30 बजे ग्रामीण एसपी से मिले। एसपी ने ग्रामीणों की बात सुनने के बाद मामले में स्पेशल टीम का गठन कर बच्चों की मौत के कारणों का पता लगाने के निर्देश दिए। इस मौके पर ग्रामीणों ने बताया कि कुतबापुर निवासी बीरेंद्र सिंह का बेटा श्याम (17) और बीरेंद्र के साला का लड़का गांव निमोठ निवासी नरबीर सिंह (13) सिहमा के सरकारी स्कूल में पढ़ते थे। 8 नवंबर को किसी बात को लेकर श्याम व नरबीर का स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों से झगड़ा हो गया था। इस झगड़े में शिक्षकों की मौजूदगी में उनके सहपाठियों ने दोनों बच्चों से मारपीट कर घायल कर दिया था। इसकी शिकायत उन्होंने फैजाबाद पुलिस चौकी में दी थी, लेकिन फैजाबाद पुलिस चौकी इंचार्ज ने उनकी बात को अनसुना कर दिया। 11 नवंबर को उसके सहपाठियों ने फिर दोनों बच्चों से फिर मारपीट कर उनकी हत्या कर जनस्वास्थ्य विभाग के वाटर टैंक में डाल दिया। जब शाम तक दोनों बच्चे घर नहीं पहुंचे तो परिजनों ने उनकी काफी तलाश की, लेकिन कोई सुराग नहीं लगा। रविवार को दोपहर बाद दोनों बच्चों को खोजते हुए परिजन गांव के निकट स्थित जनस्वास्थ्य विभाग के वाटर टैंक की तरफ गए। वहां उन्होंने पानी में तैरते हुए एक बच्चे की चप्पल देखी। इस पर उन्हें बच्चों के वाटर में डूबने का शक हुआ। इस पर परिजनों ने इसकी सूचना फैजाबाद पुलिस चौकी में दी। सूचना मिलने पर पुलिस ने गोताखोर बुला कर तीन घंटे बाद दोनों शवों को वाटर टैंक से बरामद किया था। इस दौरान शवों के सिर पर चोट के गहरे निशान दिखाई दे रहे थे, लेकिन परिजनों ने आनन-फानन में इस ओर ध्यान नहीं दिया तथा पुलिस के कहने पर दोनों शवों को नारनौल के नागरिक अस्पताल भिजवाया। सोमवार सुबह जब चिकित्सक शव गृह में पहुंचे तो चोट के निशानों को देख कर पोस्टमार्टम करने से मना कर दिया। उन्होंने पोस्टमार्टम के लिए शव को पीजीआई रोहतक रेफर कर दिया, लेकिन पुलिस ने रोहतक में पोस्टमार्टम करवा उन्हें रिपोर्ट दिखाए बिना ही इत्तफाकिया घटना की कार्रवाई की है। वहीं ने पुलिस बच्चे की जेब से मिले मोबाइल को भी अपने पास रख लिया है।
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