अमर उजाला ब्यूरो
नारनौल। मालवांचल कंपनी पर निवेशकों को बेहतर रिटर्न का झांसा देकर करीब 20 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का आरोप है। कंपनी ने निवेशकों व एजेंटों के लिए अच्छे ऑफर रखे हुए थे। बैंक से अधिक ब्याज मिलने के चक्कर में सैकड़ों लोगों ने कंपनी में पैसे निवेश किया। दूसरी ओर कंपनी ने हर तबके के लोगों को जोड़ने के लिए अलग-अलग प्लान बनाया हुआ था। छोटे लोगों के लिए प्रतिमाह 240 रुपये साढ़े चार साल तक जमा करना था। दूसरी ओर बड़े ग्राहकों को एफडी पर मूलधन पर पांच साल में दोगुना व आठ साल में तीन गुना करने का झांसा दिया था। ऐसे में काफी निवेशक कंपनी के झांसे में आ गए और पैसे जमा कराए।
कंपनी ने साल 2011-12 में नारनौल में कारोबार शुरू किया था। दो साल तक जिले में कंपनी का कारोबार तेजी से फैला। कंपनी ने एजेंटों को एफडी पर पांच फीसदी का कमीशन देती थी। एजेंटों को शहर के साथ अच्छे होटलों में मीटिंग करना और पैसे कमाने का लालच देती थी। ऐसे में लोगों ने काफी संख्या में रिश्तेदारों को भी कंपनी जोड़ा। कंपनी पैसे जमा कराने के बाद एक बांड व पैसे की रसीद देती थी। कंपनी ने पांच-पांच लोगों का ग्रुप बनाया था, जो लोगों को पैसे जमा करने के लिए प्रेरित करते थे।
कंपनी में रेवाड़ी, झज्जर, गुरुग्राम, अलवर समेत अन्य जगहों के लोगों ने पैैसे निवेश किया था। जांच अधिकारी सज्जन सिंह ने बताया कि अभी पीड़ितों की संख्या और भी बढ़ सकती है। शिकायत पर केस दर्ज कर लिया गया है और मामले की जांच की जा रही है।
मैनेजमेंट का दावा था कि पैसे डूब नहीं सकते
पीड़ितों के अनुसार प्रबंधन ने बताया था कि कंपनी का कई प्रकार के कारोबार हैं। पीड़ित प्रदीप कुमार ने बताया कि निवेशकों को बताया गया था कि कंपनी का कई शहरों में प्रोजेक्ट चल रहे हैं। मैनेजमेंट का दावा था कि पैसे किसी भी सूरत में डूब नहीं सकता। कंपनी की वित्तीय स्थित काफी अच्छी है। जीएम दीपक दीक्षित मीटिंग में कंपनियों के रजिस्ट्रेशन एवं व्यापार प्रारंभ करने के आवश्यक कागजात भी दिखाये थे। भरोसा दिलाया की कंपनियां कानूनी रूप से सही हैं।
पीएसीएल घोटाला सामने आने पर कारोबारी धीमा हुआ
दो साल तक कंपनी का कारोबार अच्छा चला। एजेंटों ने लोगों के काफी पैसे जमा कराए। साल 2015 नारनौल में पीएसीएल कंपनी का धोखाधड़ी का मामला सामने आ गया। इससे मानवांचल कंपनी का काम धीमा हो गया। कंपनी के काफी प्रयास के बाद काम दोबारा जोर नहीं पकड़ा। लेकिन, कंपनी ने करोड़ों रुपये लोगों से जमा करा लिए थे। शिकायतकर्ता प्रदीप ने बताया कि कंपनी का काम बीच में बंद होता फिर शुरू हो जाता था। साल 2016-2017 में काफी लोगों की एफडी पूरी हो गई। कुछेक के पैसे देकर कंपनी से विश्वास बढ़ाने का प्रयास किया। बाद में कंपनी के ब्रांच ऑफिस बंद कर दिया और मोबाइल नंबर भी बदल गए।
इन निवेशकों ने दी शिकायत
पुलिस को प्रदीप कुमार मंढाणा गांव, रामनरेश शर्मा डुमरौली, जितेंद्र कुमार कांहावास, बजरंग सिंह बसई, विजयपाल, सोमदत्त शर्मा, कंवर सिंह व संतोष कुमार नीमराना, पवन सिंह, जितेंद्र सिंह व अश्वनी कुमार गांव खेड़ी कांटी, अमर सिंह व ओमप्रकाश अलवर, रामबीर व राज सिंह झज्जर, बलबीर सिंह पलड़ा, सत्यवान सागरपुर अटेली, सीमादेवी पटौदी, अजित सिंह खांडसा, मुकेश, रामकिशन ककराला व फूलवती रेवाड़ी, दिनेश कुमार खानपुर नारनौल, जगदीप डरोली जाट, जयनारायण व प्रहलाद सिंह गुरुग्राम, सुरेंद्र सिंह, नेपाल बल्लभगढ़, इंद्रा बहादुर व विक्रम फरीदाबाद, अशोक सलीमपुर, सत्यवीर, सुमेर सिंह साहपुर दो, जिले सिंह खेडकीदौला समेत 100 लोगों ने शिकायत दी है। इसके अलावा अन्य भी है।