जिला उपभोक्ता फोरम ने स्टार हेल्थ एंड अलाइड इंश्योरेंस पर उपभोक्ता को सही सेवाएं नहीं देने पर हर्जाना देने के आदेश दिया है। साथ ही इलाज पर खर्च हुई राशि भी सात फीसदी ब्याज सहित 30 दिन के अंदर-अंदर देने को कहा है।
चरखी दादरी जिले के दातोली निवासी रविंद्र सिंह ने 10 अगस्त 2019 को जिला उपभोक्ता कोर्ट मेें एडवोकेट प्रमोद ताखर के माध्यम से केस दायर किया था। रविंद्र कुमार ने बताया कि स्टार हेल्थ एंड अलाइड इंश्योरेंस कंपनी की एजेंट रेणु कुमारी महेंद्रगढ़ ने 10 लाख रुपये की हेल्थ पॉलिसी का आग्रह किया। इस पर उन्होंने इस पॉलिसी की शर्तें देखकर यह पॉलिसी लेने का फैसला लिया। इसमें स्पष्ट लिखा गया था कि उसे व उसके परिवार को कैशलेस इलाज की सुविधा मिलेगी। इसके बाद उनकी पत्नी बीमार हो गई। चरखी दादरी में प्रारंभिक इलाज के बाद वह पत्नी को ओपी जिंदल अस्पताल हिसार ले गए। वहां पर 28 मार्च से एक अप्रैल 2019 तक दाखिल रही। जब कंपनी को इस बारे में बताया तो उन्होंने कैशलेस इलाज से मना कर दिया और कहा कि बाद में बिल की अदायगी कर दी जाएगी। इस दौरान लगभग 35 हजार रुपये खर्च हुए। जब उन्होंने कंपनी से इस बारे में संपर्क किया तो उन्होंने कई बार पत्र व्यवहार करने के बाद भी उनके बिल की अदायगी नहीं हुई। इसके बाद जिला उपभोक्ता फोरम का दरवाजा खटखटाया। पांच दिसंबर को उपभोक्ता कोर्ट के चेयरमैन अशोक गर्ग ने कंपनी पर हर्जाना व ब्याज सहित रकम देने का आदेश पारित किया है। आदेश में कहा कि कंपनी उपभोक्ता को कुल 28968 रुपये 30 दिन के अंदर दे। आदेशों में कहा है कि उपभोक्ता द्वारा एंबुलेंस पर 6500 रुपये खर्च किए हैं। इसमें पॉलिसी की शर्तों के अनुसार उसे 750 रुपये अधिकतम दिए जाएं तथा प्रारंभिक इलाज के लिए 1070 रुपये दिए जाएं। इसके अलावा उपभोक्ता के शोषण की एवज में 5000 रुपये तथा 2200 रुपये मुकदमा खर्च भी देने के आदेश दिए हैं।
उपभोक्ता शर्तों को अच्छी तरह पढ़ें
रविंद्र सिंह ने उपभोक्ताओं को सलाह दी है कि वे किसी भी कंपनी से इंश्योरेंस पालिसी लेते समय शर्तों को अच्छी तरह से पढ़ें। कहीं भी कंपनी गुमराह करे तो जिला उपभोक्ता अदालत में पेश होकर अपना हक लें। कई बार कंपनियां अपनी सहूलियत के हिसाब से शर्तों की व्याख्या करती हैं। ऐसे में जरूरी है कि पॉलिसी के बाद सारे कागजात को संभलकर रखें तथा कंपनी को भेजे गए पत्र आदि का पूरा सबूत अपने पास रखें। ताकि भविष्य में जरूरत पड़ने पर उपभोक्ता अदालत में केस मजबूत हो।