विकास ने इसकी जानकारी अजय के घरवालों को दी थी। इसके बाद उसकी बहन ने देखा तो अजय कमरे में नहीं था। उसकी बाइक भी घर में नहीं थी। इस पर उसने सोचा कि शायद अजय पेपर बांटने चला गया। कुछ देर बाद मां तूड़ा लेने गई तो अजय फांसी पर लटका हुआ मिला।
मैं इस जीवन से दुखी हूं
पिता ने पुलिस को दिए बयान में बताया कि छह माह पहले भी अजय ने दोस्त विकास से कहा था कि मैं अपने जीवन से दुखी हूं। किसी दिन भी आत्महत्या कर लूंगा। जीवन किसी काम का नहीं है। परिजन इस पर ध्यान रखते थे। लेकिन, उसने ऐसा कदम नहीं उठाया। ऐसा वह कई बार कर चुका था।
शनिवार चार बजे भोर में फोन कर दोस्त को जान देने की बात कही। जांच अधिकरी ने बताया कि बहन ने देखा तो अजय कमरे में नहीं था। उन्होंने बताया कि पहले भी वह इस प्रकार की बात कर चुका था। ऐसे में परिवार वालों को शक नहीं हुआ। दूसरा अजय रोजाना सुबह अखबार बांटने जाता है। ऐसे में लोगों को लगा कि पेपर बांटने गया होगा। पुलिस ने इत्तफाकिया कार्रवाई की है।