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पार्षद फिर लाए अविश्वास प्रस्ताव, चेयरपर्सन बोलीं - हमारे पास हाईकोर्ट का स्टे आर्डर

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नगर पालिका के पार्षद एक बार फिर नपा चेयरपर्सन रीना गर्ग के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव ले आए हैं। उपायुक्त के निर्देश पर एसडीएम ने अविश्वास प्रस्ताव पर 14 सितंबर को नगर पालिका कार्यालय में पार्षदों की विशेष बैठक बुलाई है। पार्षदों को बैठक के लिए एसडीएम की ओर एक लेटर के माध्यम से सूचित किया गया है। पार्षद 2018 में नपा चेयरपर्सन के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव ला चुके हैं। जिस पर पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय की डबल बैंच में केस चल रहा है। नपा चेयरपर्सन रीना गर्ग ने उपायुक्त पर खुले रूप से व्यक्ति कारणों एवं राजनीति दबाव के चलते ऐसा करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि हाई कोर्ट की डबल बेंच से उनको अविश्वास प्रस्ताव की बैठक पर स्टे मिला हुआ है। उपायुक्त को लिखित में एक लेटर भेजकर इन आदेशों को वापस लेने की चेतावनी दी है।
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25 अगस्त को नगर पालिका के आठ पार्षद एकत्रित होकर उपायुक्त आरके सिंह के पास अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए ज्ञापन दिया था। उन्होंने ज्ञापन में बताया कि महेंद्रगढ़ नगर पालिका की चेयरपर्सन रीना गर्ग दायित्वों को निर्वहन करने में असफल रही हैं। उन्होंने बताया कि इस संदर्भ में 17 अगस्त को 2020 को हरियाणा सरकार के असाधारण गजट बैठक 22/2020में अधिसूचित अध्यादेश-6/2020(हरियाणा म्यूनिसिपल संशोधन अध्यादेश 2020) के अनुसार हरियाणा अधिनियम 1973 के द्वितीय संशोधन 4 सितंबर 2019 से पहले के अधिनियम की संबंधित धाराएं लागू होंगी। पार्षदों के निवेदन पर उपायुक्त आरके सिंह ने 14 सितंबर की बैठक नपा कार्यालय में रख दी। एसडीएम विश्राम कुमार मीणा को 26 अगस्त को बैठक निकालने के आदेश दे दिए। एसडीएम ने 28 अगस्त को सभी पार्षदों को 14 सितंबर की बैठक के लिए नोटिस जारी कर दिया। ज्ञापन देने वाले पार्षदों कमलेश तायल, मंजू महायच, बबीता सैनी, विष्णु कुमार, रमेश कुमार, देवेंद्र सैनी, नरेंद्र खन्ना, तरुण यादव शामिल थे।
नपा चेयरपर्सन ने उपायुक्त पर लगाए आरोप
नपा चेयरपर्सन रीना गर्ग ने बताया कि अविश्वास प्रस्ताव पर हाईकोर्ट ने रोक लगाई हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीति प्रभाव में आकर उपायुक्त उनसे रंजिश अपना रहे हैं। इन पार्षदों ने 15 जून 2020 की बैठक में असहमति जताने पर उसने उपायुक्त को बजट अनुमोदन न करने पर जिम्मेवार बनाया था। जिस कारण वह उसे ईर्ष्या करने लगे। हाईकार्ट की डबल बेंच के आदेेेश की जानकारी होने के बाद भी आदेशों का दरकिनार करते हुए अविश्वास प्रस्ताव बैठक बुलाने के आदेश पारित किए। सरकार ने अब जिला पालिका आयुक्त लगाया हुआ है। उपायुक्त ये आदेश जिला पालिका आयुक्त को दनकिनार करके नहीं दे सकते। उन्होंने अपने नोटिस में यह भी कहा कि उपायुक्त ने अविश्वास प्रस्ताव के आदेश वापस नहीं लिए तो वह हाई कोर्ट में जाकर उपायुक्त, एसडीएम और आठों पार्षद के खिलाफ अवमानना की याचिका दायर करेंगे।
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मेरी किसी से कोई ईर्ष्या नहीं है। हम कानून के दायरे में रहकर काम करते हैं। अविश्वास प्रस्ताव के आदेश सोच समझकर और कानूनी दायरे में रहकर दिए गए हैं। कोर्ट के आदेश जो होंगे वो माने जाएंगे।
-आरके सिंह, उपायुक्त, महेंद्रगढ़
तीन पार्षदों के बैठक में शामिल होने की रोक थी। कोर्ट द्वारा तीनों पार्षदों को बैठक में शामिल होने के आदेश जारी पहले किए जा चुके हैं। एक प्रस्ताव की मियाद दो वर्ष की होती है, उसकी मियाद पूरी होने पर दोबारा से अविश्वास प्रस्ताव लाया जा सकता है।
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- अमित मिश्रा, विरोधी पार्षद
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