महेंद्रगढ़। जया कॉलोनी स्थित श्रीमद्भागवत कथा सातवें दिन महाराज पंडित कुलदीप भारद्वाज महाराज ने श्रोताओं को बताया कि रुक्मिणी कृष्ण विवाह के बाद भगवान ने सोलह हजार एक सौ आठ विवाह किये। रुक्मिणी सत्यभामा आदि आठ पटरानीया मुख्य थीं। भोमासुर राक्षस की कैद से सोलह हजार एक सौ आठ कन्याओं को मुक्त कराया सब कन्याओं ने कहा कि अब हम कहां जाएं हमारे घर वाले हमें स्वीकार नहीं करेंगे। राज कुमार भी हमें स्वीकार नही करेगा। भगवान ने कहा जिसको दुनिया में कोई नहीं अपनाता उसको हम अपनाते है। भगवान ने उनसे विवाह किया इस तरह भगवान ने सोलह हजार एक सौ आठ विवाह संपन्न किए। उन्होंने सुदामा के चरित्र का वर्णन किया और बताया कि श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता कभी भूल ही नहीं जा सकती। सुदामा एक श्रेष्ठ जितेंद्रिय ब्रह्म को जानने वाले थे। लोग उन्हें निर्धन कहते हैं, लेकिन सबसे बड़ा धनी वहीं है। जिसके पास श्रीकृष्ण नाम का धन है।