सहकारी समितियों ने विजिलेंस के डायरेक्टर, शहरी स्थानीय निकाय के निदेशक व डीसी महेंद्रगढ़ को पत्र लिखकर नगर पालिका के अधिकारियों और कार्यवाहक प्रधान पर आरोप लगाए हैं। जिसमें टेंडर सहकारी समितियों की बजाय प्राइवेट ठेकेदारों को देने के अलावा विकास कार्यों में घटिया निर्माण सामग्री उपयोग करने का आरोप भी लगाया। समितियों ने इस मामले की जांच के लिए अनुरोध किया है।
सहकारी समिति के संचालक योगेश कुमार, दिनेश कुमार, मनोज कुमार, हरिप्रकाश, गोपाल व शीशपाल सहित अन्य लोगों के नाम से यह शिकायत भेजी गई है। तीन पन्ने के इस पत्र में 17 बिंदुओं को उठाया गया है। सहकारी समितियों के संचालकों ने कहा कि 24 जून 2020 को लगाए गए टेंडर को आज न तक न तो ओपन किया गया, न ही उनको रद्द किया गया। उन्हीं टेंडर को नाम बदलकर 8 व 11 जनवरी 2021 को दोबारा से लगाया गया। यह टेंडर पहले से लगभग तीन गुुना अधिक कीमत पर लगाए गए। जिसकी शिकायत पार्षद मनीष, कृष्णा जांगड़ा 11 जनवरी को भेजी थी। पोर्टल की बजाय टेंडर को स्थानीय शर्तों के अनुसार लगाया गया। नियम के अनुसार नगर पालिका के काम सहकारी समितियों के जरिये कराए जाते हैं। पहली बार आवेदन मांगने पर कोई समिति नहीं आए तो दूसरी बार आवेदन मांगे जाते हैं। दूसरी बार भी समितियां न आएं तब समितियों की बजाय प्राइवेट ठेकेदारों से आवेदन लिए जाते हैं। अधिकारियों ने इन नियमों का पालन नहीं किया। पहली स्टेज में ही प्राइवेट ठेकेदारों को काम सौंप दिए गए। नियम के अनुसार तीन से कम फर्म आने पर टेंडर को रद्द किया जाता है। इन टेंडर में अधिकतर मामलों में दो दो फर्म आने पर ही उनको टेंडर जारी कर दिया गया। आरोपियों ने मर्जी से कार्य का रूप ही बदल दिया। सीसी की सड़कों की बजाय इंटरलाकिंग टायल में बदल दिया।
शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया कि विकास कार्यों में घटिया निर्माण सामग्री का उपयोग किया जा रहा है। पीसीसी में सीमेंट की मात्रा नगण्य है। इंटरलॉकिंग टायल की गुणवत्ता भी खराब है। निर्माण सामग्री को लेकर सीएम विंडो पर भी कई शिकायत दर्ज कराई जा चुकी है। विकास कार्यों के लिए तकनीकी व प्रशासकीय अनुमति भी नहीं ली गई।