नांगल चौधरी। छोटे नोट खासतौर पर दस रुपये के नोटों की उपलब्धता को लेकर लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं। पहले शादी-ब्याह या धार्मिक कार्यक्रमों के लिए नई नोटों की गड्डी लेना बेहद आसान था। लोग बैंक में जाकर शादी का कार्ड दिखाते और कर्मचारी खुशी-खुशी दो-तीन गड्डियां थमा देते थे लेकिन अब हालात पूरी तरह बदल चुके हैं। जहां पहले बिना सिफारिश काम हो जाता था, वहीं आज बड़े-बड़े पहचान वालों की बात भी काम नहीं आती।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि बैंक में कर्मचारी गड्डियां उपलब्ध न होने की बात कहते हैं लेकिन वहीं गड्डियां बाहर खुले बाजार में आसानी से मिल जाती हैं, वह भी 400-500 रुपये अधिक कीमत पर। यह स्थिति न केवल सवाल खड़े करती है बल्कि बैंकिंग सिस्टम के अंदर मौजूद एक गहरे भ्रष्टाचार की ओर भी इशारा करती है।
सरकार और बैंकिंग विभाग से लोग उम्मीद कर रहे हैं कि इस तरह की अनियमितताओं पर रोक लगे, ताकि छोटी-छोटी जरूरतों के लिए लोगों को अतिरिक्त पैसे न चुकाने पड़ें और भ्रष्टाचार पर भी लगाम लग सके।