फोटो 22डॉ. संजय शर्मा, मोती नगर नारनौल।
वर्ष 1999 में सैनिकों के लिए आयोजित एक रक्तदान शिविर से मुझे प्रेरणा मिली थी। उस दिन मैंने महसूस किया कि यदि मेरे रक्त की कुछ बूंदें किसी जरूरतमंद की जान बचा सकती हैं तो इससे बड़ा कोई पुण्य कार्य नहीं हो सकता। तभी मैंने नियमित रूप से रक्तदान करने का संकल्प लिया।27 वर्षो में 36 बार रक्तदान करने के बाद पीछे मुड़कर देखता हूं तो गर्व होता है कि मुझे कई जरूरतमंद लोगों की सहायता करने का अवसर मिला। कई बार आपातकालीन परिस्थितियों में भी रक्तदान किया और मरीजों के परिजनों की आंखों में राहत और खुशी देखी। वही पल मेरे लिए सबसे बड़ा सम्मान हैं।
-डॉ. संजय शर्मा, मोती नगर, नारनौल