फोटो नंबर-10छापामार कार्रवाई के दौरान खाली पड़ी कर्मचारियों की कुर्सी। संवाद
नारनौल। सिंघाना रोड स्थित जिला नगर योजनाकार विभाग के कार्यालय में वीरवार सुबह अचानक मुख्यमंत्री उड़नदस्ता की टीम ने छापामार कार्रवाई की। सीएम फ्लाइंग टीम जैसे ही नौ बजकर दस मिनट पर डीटीपी कार्यालय में पहुंची तो उस समय केवल एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी व एक क्लर्क मौजूद था। कार्यालय में कुल 17 कर्मचारी नियुक्त हैं।
सीएम फ्लाइंग टीम को देखते ही कर्मचारियों में हड़कंप मच गया। इसकी सूचना के बाद चार अन्य कर्मचारी साढ़े नौ से दस बजे तक कार्यालय में पहुंचे। डीटीपी कार्यालय में छापामार कार्रवाई मुख्यमंत्री उड़नदस्ता की टीम ने डीएसपी दिनेश यादव के नेतृत्व में की, जिसमें खुफिया विभाग जिला महेंद्रगढ़ की टीम भी मौजूद रही। इसमें सिंचाई विभाग के एक्सईएन नितिन भार्गव को ड्यूटी मजिस्ट्रेट बनाया गया। टीम ने जब जिला नगर योजनाकार विभाग के ऑफिस में छापेमारी की, तब वहां केवल एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी व एक क्लर्क ही मौजूद था। इसके अलावा अन्य 11 कर्मचारी गैर हाजिर रहे। इनमें जिला नगर योजनाकार अधिकारी, जूनियर इंजीनियर, अन्य अधिकारी और कर्मचारी भी शामिल रहे। इनमें एक कौशल योजना के तहत लगाया गया कर्मचारी भी अनुपस्थित पाया गया। इस बारे में ड्यूटी मजिस्ट्रेट नितिन भार्गव ने बताया कि मुख्यमंत्री उड़नदस्ता की टीम के साथ उन्होंने छापा डाला है। इसमें लगभग कर्मचारी व अधिकारी अनुपस्थित पाए गए हैं। इनकी रिपोर्ट बनाकर वे उच्च अधिकारियों को भेजेंगे। इसके बाद उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। कार्यालय में सीएम विंडो और जन संवाद की कोई भी शिकायत लंबित नहीं पाई गई। वहीं, एनओसी 7ए से संबंधित 50 आवेदन लंबित पाए गए जो समय अवधि के अंदर में है।
देरी से पहुंचे कर्मचारी देते रहे दलील
छापामार कार्रवाई के दौरान साढ़े नौ बजे के बाद केवल चार कर्मचारी ही कार्यालय में पहुंचे। टीम के आगे देरी से पहुंचने पर कर्मचारी अपनी-अपनी दलील देते नजर आए। एक कर्मचारी का कहना था कि वह रेवाड़ी से अप-डाउन करता है, इसलिए देरी हो गई। एक महिला कर्मचारी का कहना था कि ठंड ज्यादा होने की वजह उन्हें कुछ देरी हो गई।
टीम ने कहा- कार्यालय का है बुरा हाल, इसलिए हुई कार्रवाई
जिला नगर योजनाकार विभाग के कार्यालय में छापामार कार्रवाई के दौरान टीम के सदस्यों ने बताया कि कार्यालय का बुरा हाल है। इसकी शिकायत मिल रही थी कि कर्मचारी कभी भी 10 बजे से पहले नहीं आते हैं। वहीं, जूनियर इंजीनियर लोगों के फोन भी नहीं उठाते हैं। कर्मचारियों की इसी कार्यप्रणाली को लेकर यह कार्रवाई अमल लाई गई।