धारूहेड़ा-भिवाड़ी सीमा पर चल रहा निर्माण कार्य। संवाद
धारूहेड़ा। नई दिल्ली में मंगलवार को उच्च स्तरीय बैठक होने के बाद बुधवार को धारूहेड़ा-भिवाड़ी सीमा पर जलभराव से मुक्ति दिलाने के लिए कार्य शुरू कर दिया गया है। इस मुद्दे पर केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई जिसमें संबंधित राज्यों और विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया था।
धारूहेड़ा नगर पालिका चेयरमैन कंवर सिंह ने बताया कि केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह के प्रयासों से राजस्थान के भिवाड़ी औद्योगिक क्षेत्र से निकलने वाले प्रदूषित पानी और धारूहेड़ा में जलभराव की लंबे समय से चली आ रही समस्या को लेकर केंद्र स्तर पर ठोस पहल की गई है।
बैठक के दौरान राव इंद्रजीत सिंह ने बताया था कि भिवाड़ी औद्योगिक क्षेत्र से निकलने वाला रासायनिक और दूषित पानी हरियाणा के धारूहेड़ा क्षेत्र में एकत्र हो रहा है। इससे न केवल स्थानीय निवासियों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो रहा है बल्कि नेशनल हाईवे पर जलभराव के कारण यातायात बाधित हो रहा है और बार-बार जाम जैसी स्थिति बन जाती है।
यह समस्या औद्योगिक क्षेत्र के साथ-साथ आमजन और यात्रियों के लिए भी परेशानी का कारण बनी हुई है। बैठक में राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने भिवाड़ी से आने वाले प्रदूषित पानी को नियंत्रित करने के लिए मार्च माह तक सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) के निर्माण कार्य को पूरा करने का आश्वासन दिया था।
उन्होंने कहा कि एसटीपी के चालू होने से औद्योगिक अपशिष्ट जल का उचित उपचार होगा और बिना शुद्धिकरण के पानी को हरियाणा की सीमा में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा।
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400 करोड़ रुपये की योजना है तैयार
समस्या के स्थायी समाधान के लिए लगभग 400 करोड़ रुपये की एक व्यापक योजना पर भी गहन विचार-विमर्श किया गया। इस योजना के तहत प्रभावी जल निकासी व्यवस्था, प्रदूषण नियंत्रण के पुख्ता इंतजाम और नेशनल हाईवे पर जलभराव रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।