नारनौल। प्रिय बहन, आज डिजिटल दुनिया के दौर में मैं तुम्हें कागज की चिट्ठी लिख रही हूं...हाथ से लिखी इन पंक्तियों में जो अपनापन था, वह किसी मैसेज में कहां। शुक्रवार को नारनौल में कुछ ऐसा ही नजारा दिखा, जब बच्चे कलम थामे अपनों के नाम चिट्ठियां लिखते नजर आए।
विश्व डाक दिवस पर प्रगतिशील शिक्षक ट्रस्ट की ओर से हुडा सेक्टर स्थित निजी स्कूल में चिट्ठी लिखो-रिश्ते जोड़ो अभियान आयोजित किया गया। डिजिटल संदेशों के दौर में, एक चिट्ठी अपनों के नाम थीम पर हुए इस कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने अपनों के नाम पत्र लिखकर प्रेम जताया।
कार्यक्रम का आकर्षण रही भावनाओं की पत्र-पेटी, जिस पर लिखा था...इसमें संदेश नहीं, भावनाएं डालिए। डाक विभाग ने ट्रस्ट के आग्रह पर यह विशेष पेटी लगाई। बच्चों की चिट्ठियां इसमें डाली गईं और उन्हें लिखे गए पतों पर पहुंचाया जाएगा। कुछ वरिष्ठजनों ने भी पत्र लिखकर पुरानी यादें ताजा कीं।
मुख्य अतिथि मुख्य डाकपाल ब्रह्म प्रकाश यादव ने कहा कि साधन बदल गए, पर चिट्ठियां भावनाओं की अनूठी अभिव्यक्ति हैं। विशिष्ट अतिथि हिम्मत सिंह ने डाक विभाग की भूमिका को भारतीय संस्कृति से जोड़ा। ट्रस्ट अध्यक्ष डॉ. संजय शर्मा ने कहा कि अभियान का उद्देश्य बच्चों में भावनाएं व्यक्त करने और रिश्तों के प्रति संवेदनशीलता विकसित करना है।
निबंध प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कृत किया गया और डाक विभाग के कर्मचारियों को सम्मानित किया गया। अध्यक्षता निदेशक अमित गुप्ता ने की, संचालन डॉ. जितेंद्र भारद्वाज ने किया। ट्रस्टी नरोत्तम सोनी, प्राचार्य दिनेश शर्मा, रविंद्र कुमार सहित कई लोग मौजूद रहे।
बॉक्स 1
मैं विश्व डाक दिवस पर अपनी बहन को पहली बार पत्र लिखते हुए रोमांचित हूं। पत्र लिखते समय मुझे पहली बार महसूस हुआ कि रिश्तों में कितना प्यार दिखाई देता है। मैंने बहन को सारा हाल बताते हुए उससे जल्द जवाब देने का अनुरोध किया है, ताकि पत्रों का यह क्रम फिर से बना रहे।-तन्वी, छात्रा
बॉक्स 2
लंबे अर्से बाद पत्र लिखकर अपनी भावनाओं और यादों को ताजा किया। पत्र का जो प्यार और जवाब आने का इंतजार रहता था, वह आज लुप्त हो गया है। रिश्तों में प्यार के लिए पत्राचार बहुत जरूरी है।
-अतर सिंह, सेवानिवृत्त पुलिसकर्मी
एक चिट्ठी, बहन के नाम
प्रिय बहन,
आज डिजिटल दुनिया के इस दौर में मैं तुम्हें यह कागज की चिट्ठी लिख रही हूं। आजकल हम फोन और कंप्यूटर पर रोज ही बात करते हैं, पर इस खत का मजा ही कुछ और है। फोन के मैसेज तो तुरंत डिलीट हो जाते हैं, पर तुम इस चिट्ठी को यादगार की तरह हमेशा संभालकर रख सकती हो। यह खत हमारी बचपन की एक याद बन जाएगा। मुझे उम्मीद है तुम्हें यह सरप्राइज अच्छा लगेगा।
-तुम्हारी प्यारी बहन