जिला प्रशासन की ओर से नगर परिषद की चेयरपर्सन अंजना अग्रवाल पर लगाए गए धोखाधड़ी समेत 12 आरोपों पर शहरी स्थानीय निकाय हरियाणा ने भी मोहर लगा दी है। आरोप सही पाए जाने पर निकाय के निदेशक विकास गुप्ता ने चेयरपर्सन को निलंबित कर दिया।
बता दें कि फरवरी में डीसी अतुल कुमार ने महेंद्रगढ़ में कार्यभार संभालने के बाद भ्रष्टाचार पर पाबंदी लगाने की बात कही थी। इसी दौरान कुछ विपक्षी पार्षदों ने नप प्रधान अंजना अग्रवाल पर अनियमितता का आरोप लगाया था। डीसी ने लोगों से सबूत मांगे थे। बाद में इसी मसले में नगर परिषद में मासिक बैठक न करवाने से नाराज कुछ पार्षद 2 जून को डीसी से मिले और सबूत पेश किए।
इन सबूतों की जांच डीसी ने एसडीएम कैप्टन मनोज सिंह को सौंपी। 150 के करीब सबूतों में से जांच के दौरान एसडीएम ने 12 सबूतों को पुख्ता माना और नप प्रधान और उनके पति रतनलाल के खिलाफ 7 जून को धोखाधड़ी और साजिश रचने आदि की रिपोर्ट दर्ज करा दी।
मामले को लंबित करने की मिली सजा
हरियाणा नगर पालिका अधिनियम 1973 की धारा 22 ए में निहित प्रावधानों के तहत निदेशालय ने 12 जून को नप प्रधान को कारण बताओ नोटिस जारी किया। इसमें 18 जून को सुबह 10 बजे व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर भी दिया गया। सुनवाई के दौरान प्रधान अपने वकील के साथ उपस्थित हुईं और कारण बताओ नोटिस का जवाब देने के लिए समय दिए जाने का अनुरोध किया। जबकि नगर परिषद के ईओ इस मामले में कारण बताओ नोटिस का जवाब 16 जून को ही दे चुके थे।
शहरी स्थानीय निकाय के निदेशक विकास गुप्ता ने माना कि अंजना अग्रवाल अपने ऊपर लगे आरोपों का उत्तर देने के मामले को लंबित रखना चाहती थीं। एसडीएम की जांच रिपोर्ट में प्रधान पर गंभीर आरोप लगाए गए है। इसमें नगर परिषद को वित्तीय हानि के साथ-साथ धोखाधड़ी, अनियमितताओं और रिश्वत लेना आदि शामिल हैं। इन्हीं आरोपों के चलते हरियाणा नगर पालिका अधिनियम 1973 की धारा 22 (ए) में निहित प्रावधानों के तह अंजना अग्रवाल को प्रधान पद से निलंबित कर दिया गया।
ये लगे थे आरोप
2013 के मध्य से लेकर वर्ष के अंत तक 500 से अधिक विकास कार्य पालिका अधिनियम की धारा 35 के तहत इमरजेंसी में कराए गए। एक भी कार्य टेंडर प्रणाली द्वारा नहीं करवाया गया। एनओसी जारी करने के लिए जेई, एमई, बीआई और ईओ और उसके बाद प्रधान के हस्ताक्षर अनिवार्य है। जबकि प्रधान ने केवल अपने हस्ताक्षर से ही एनओसी जारी कर दी। व्यक्तिगत यात्रा करने में नगर परिषद की सरकारी गाड़ी का प्रयोग प्रधान के पति द्वारा किया गया। धारा-35 के तहत करवाए गए कार्य में गुणवत्ता न होने, नारनौल शहर के खसरा नंबर 10131 और 10140 पर अवैध कब्जा करवाने आदि के आरोप लगाए थे। विपक्षी पार्षदों ने इसके डीसी को इसके सबूत भी सौंपे थे।
गिरफ्तारी और रिकवरी की उठी मांग
28 मार्च से 4 अप्रैल 2011 तक नगर परिषद में फैले भ्रष्टाचार के खिलाफ धरना देने वाले नगर विकास मंच के अरुण जैन ने प्रशासन की इस कार्रवाई की सराहना की है। उन्होंने आगे का कार्यभार प्रशासन के अंडर ही कराने की मांग की है। वहीं विपक्षी पार्षद दयानंद सोनी, देवकरण चौहान और रेखा सोनी के प्रतिनिधि श्यामसुंदर ने सोमवार नगर परिषद पहुंचकर खुशी जाहिर की। उन्होंने प्रधान और उनके पति की गिरफ्तारी और रिकवरी की मांग की है।
उपप्रधान बन सकते है प्रधान!
डीसी अतुल कुमार ने प्रधान अंजना अग्रवाल के निलंबन की पुष्टि कर दी है। प्रधान पद पर अब कौन बैठेगा? इस सवाल पर डीसी ने कहा कि उनके हिसाब से तो उपप्रधान राजेंद्र यादव बिल्लू को चार्ज सौंपा जाना चाहिए। इस संबंध में उच्चाधिकारियों की ओर से कोई पत्र नहीं आया है। जल्द ही फैसले की उम्मीद है।