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सीबीआई ने भाठोठा, खानपुरा तथा लहरोदा में छापेमारी की

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नारनौल। जम्मू-कश्मीर में उपनिरीक्षक भर्ती में धांधली से जुड़े मामले में सीबीआई की टीम ने मंगलवार को गांव भाठोठा, खानपुरा और लहरोदा में छापा मारा। टीम ने मामले में संलिप्त नरेंद्र निवासी गांव भाठोठा, पवन कुमार निवासी खानपुरा तथा अनिल कुमार निवासी लहरोदा के घर छापा मारकर तलाशी ली। इस दौरान बैंक एकाउंट की कॉपी तथा आईडी भी कब्जे में लिया। साथ ही तीनों को नोटिस के माध्यम से बुधवार को सीबीआई पुलिस अधीक्षक एंटी करप्शन कोर्ट जम्मू-कश्मीर में पेश होने के आदेश जारी दिए।
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जम्मू कश्मीर में 2022 में पुलिस उपनिरीक्षक की भर्ती हुई थी। इसमें हुई धांधली के मामले की सीबीआई जांच कर रही है। इसी सिलसिले में मंगलवार को सीबीआई की टीम सफेद रंग की कार से सुबह 7:50 बजे गांव भाठोठा में नरेंद्र के घर पहुंची। टीम में सीबीआई इंस्पेक्टर, एसआई मनीष जैन, एसआई वीरेंद्र कुमार तथा गुरमेल सिंह थे। टीम ने पूरे घर की तलाशी ली तथा आरोपी नरेंद्र की बैंक एकाउंट की जांच की। बैंक कापी में अप्रैल में लगभग 9 लाख रुपये की राशि जमा दिखाई गई है। इसके तीन-चार दिन बाद धनराशि कैश, चेक तथा आरटीजीएस के माध्यम से अलग-अलग दिनों में निकाली गई है। सीबीआई टीम नरेंद्र की आईडी एवं दो मोबाइल साथ लेकर गई है। इसके अलावा एक नोटिस भी जारी किया है। टीम ने गांव खानपुर में पवन तथा गांव लहरोदा में अनिल के घर भी नोटिस जारी कर बुधवार सुबह 10:00 बजे सीबीआई कोर्ट जम्मू-कश्मीर में पेश होने के आदेश दिए हैं। सीबीआई टीम ने लगभग साढ़े 3 घंटे तक जांच की।
गांव भाठोठा निवासी नरेंद्र ने बताया कि वह पिकअप चलाता है। ग्राम खानपुरा निवासी पवन कुमार जम्मू-कश्मीर में सीआरपीएफ में भर्ती है। उसने अप्रैल में फोन कर 9 लाख रुपये उसके खाते में डलवा दिए थे। तीन-चार दिन बाद ही पवन के कहने पर यह राशि निकलवा कर उसको दे दी थी। इस मामले में उसकी किसी प्रकार की कोई भूमिका नहीं है। टीम ने उसे बुधवार को कोर्ट में पेश होने के लिए कहा है। टीम मेरा और मेरी पत्नी का मोबाइल ले गई है।
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पवन ने रिश्तेदार को ठहराया जिम्मेदार
पवन निवासी खानपुरा ने फोन पर हुई बातचीत में बताया कि वह आरपीएफ में सिपाही है। उसकी पोस्टिंग जम्मू- कश्मीर में है। पवन ने बताया कि उसका एक रिश्तेदार जिले में एकेडमी चलाता है। उसने जम्मू-कश्मीर में कोई पेपर करवाया था। बाद में रिश्तेदार ने उसके बैंक खाता नंबर लिया और उसमें चार लाख रुपये डलवा दिया। 9 लाख रुपये नरेंद्र के खाते में डलवा दिए थे। हमें इस मामले की बिल्कुल जानकारी नहीं थी। न ही रिश्तेदार ने इस संबंध में हमें कुछ बताया था।
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