नारनौल। जिले में गैस उपभोक्ता के यहां एक्सपायरी डेट के सिलेंडर पहुंच रहे हैं। जिले में एक्सपायरी डेट के गैस सिलेंडरों की भरमार है। गैस उपभोक्ता भी इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा। यही कारण है कि गैस सिलेंडरों में लीकेज और आग लगने की घटनाएं होने लगी हैं। गत दो दिनों में अटेली में आग लगने की दो घटनाएं हो चुकी हैं। ये घटनाएं सिलेंडर में से गैस के रिसाव के कारण हुई हैं। ऐसे में घरों में एक्सपायरी डेट के ये गैस सिलेंडर छोटे बम का रूप ले सकते हैं। वहीं खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जिले में कोई भी सिलेंडर एक्सपायरी डेट के नहीं है। एक अनुमान के मुताबिक जिले के 30 फीसदी सिलेंडर छोटे बम बने हुए हैं। जो कभी भी फट सकते हैं। सिलेंडरों की उम्र तय होने की जानकारी उपभोक्ता तक नहीं होने के कारण रसोई गैस कंपनियां इसका फायदा उठा रहे हैं। अटेली में शहर में शनिवार को कनीना रोड पर एक व्यक्ति के यहां गैस सिलेंडर में आग लगने की घटना तथा रविवार को अटेली के गांव उनिंदा में भी गैस सिलेंडर में आग लगने की घटना कुछ ऐसा ही संकेत दे रही हैं। ऐसे में उपभोक्ताओं को इस बारे में सतर्क रहना चाहिए।
उपभोक्ता नहीं देखते सिलेंडरों की उम्र रसोई गैस सिलेंडरों की उम्र भी निर्धारित मानदंड के अनुसार तय की जाती है। तय अवधि निकलने के बाद ये सिलेंडर खतरनाक हो जाते हैं। इन सिलेंडरों से गैस लीक होने और फटने की आशंका हर समय बनी रहती है। सिलेंडरों की कीमत को देखते हुए उपभोक्ता वजन और सील को तो देख लेता है, लेकिन अवधि की ओर उसकी नजर नहीं जाती।
ऐसे करें जांचप्रत्येक सिलेंडर पर एबीसीडी शब्द लिखे होते हैं। ए जनवरी से मार्च तक, बी अप्रैल से जून तक, सी जुलाई से सितंबर तक व डी अक्तूबर से दिसंबर तक होता है। इसके साथ वर्ष भी लिखा होता है, जो वर्ष होता है। वहीं उस सिलेंडर की एक्सपायरी डेट होती है।
गैस एजेंसी की जिम्मेदारीरसोई गैस सिलेंडर एक्सपायरी डेट के हैं, तो गैस एजेंसी की जिम्मेवारी होती है कि वो ऐसे सिलेंडरों की छंटनी करें और संबंधित पेट्रोलियम कंपनी में भेजे। जांच के बाद अवधि बढ़ाई जाती है।
कई बार हो चुके हैं हादसेगैस सिलेंडर लीक होने से आग लगने के हादसे कई बार हो चुके हैं। दो दिन पूर्व अटेली में हुए हादसों के अलावा करीब छह माह पूर्व नांगल चौधरी में भी ऐसा हादसा हुआ था। वहीं एक साल पूर्व नारनौल के मोहल्ला मिश्रवाड़ा में भी सिलेंडर लीक होने का हादसा हुआ था। मगर इन हादसों में जान माल का कोई ज्यादा नुकसान नहीं हुआ।
होता है कंपनी से इंश्योरेंसप्रत्येक गैस उपभोक्ता का गैस कनेक्शन लेते समय कंपनी द्वारा इंश्योरेंस किया जाता है। हालांकि इसके कुछ नियम जरूर हैं। इसमें सिलेंडर का घरेलू प्रयोग होना, आईएसआई मार्का का रेगुलेटर और कंपनी द्वारा दी गई आईएसआई मार्का की पाइप होना जरूरी है। हादसे में मारे जाने व घायल होने दोनों ही अवस्था में क्लेम लिया जा सकता है।
अकेले नारनौल में 50 हजार से अधिक उपभोक्तागैस उपभोक्ताओं की बात की जाए तो अकेले नारनौल के तहत आने वाली तीन गैस एजेंसियों पर 50 हजार से अधिक उपभोक्ता हैं। इनमें देवेंद्र गैस, भारत गैस और इंडेन गैस एजेंसी शामिल हैं। वहीं जिला में करीब एक लाख घरेलू गैस के उपभोक्ता हैं।
उपभोक्ताओं को भी बरतनी चाहिए सावधानीऐसा नहीं कि हादसों के लिए कंपनी और एजेंसी जिम्मेवार हों, बल्कि उपभोक्ता भी इन हादसों के लिए जिम्मेवार हैं। अगर उपभोक्ता पुरानी और बिना आईएसआई मार्का की पाइप, रेगुलेटर आदि का प्रयोग कर रहा है तो वह भी हादसों का कारण बन सकती हैं।
ये बरतें सावधानी - डिलवरी मैन से गैस लिकेज चैक कराएं- डिलवरी के समय एक्सपायरी तिथि देखें- रसोई में खिड़की अवश्य होनी चाहिए- चुल्हे व सिलेंडर के बीच गैप व स्लेब हो- रात को रेगुलेटर बंद कर दें- गैस की जांच करने आए लोगों का सहयोग करें- पुरानी पाइप व रेगुलेटर को समय-समय पर बदलें
पुराने और एक्सपायरी डेट के सिलेंडर नहीं आ रहे। हादसों का मुख्य कारण उपभोक्ता द्वारा असावधानियां बरतना है। असावधानी के कारण या पुराने रेगुलेटर और पाइप के कारण हादसे ज्यादा होते हैं इसलिए उपभोक्ताओं को सतर्क रहना चाहिए। -अरुण कुमार, इंस्पेक्टर खाद एवं आपूर्ति
समय-समय पर लोगों को सिलेंडरों से होने वाली घटनाओं की जानकारी दी जाती है। वहीं सिलेंडर आदि चेक भी किए जाते हैं। जल्द ही सेफ्टी क्लीनिक लगाकर उपभोक्ताओं को जागरूक किया जाएगा। -फूल कुमार, देवेंद्र गैस एजेंसी, नारनौल