नारनौल। जिले में लगातार कैंसर जैसे खतरनाक बीमारी के मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है, लेकिन इसके बावजूद जिले में एक भी कैंसर विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं है, जिसका खामियाजा मरीजों को उठाना पड़ रहा है। कैंसर जैसी बीमारी के बारे में समय पर नहीं पता चलने से हालात गंभीर हो जाते हैं और मरीज की मौत तक हो जाती है। हालांकि नारनौल के नागरिक अस्पताल में एफएनएसी से कैंसर की जांच की जाती है, लेकिन चिकित्सक ही उपलब्ध नहीं हैं तो कैसे मरीज को उपचार मिल सकेगा। अगर कैंसर विशेषज्ञ की नारनौल के नागरिक अस्पताल में नियुक्ति हो जाएं तो इस बढ़ते कैंसर मरीजों पर अंकुश लगाया जा सकता है।
एफएनएसी की जांच से भी कैंसर का चल सकता है पता
एफएनएसी जांच के माध्यम से कैंसर के शुरूआती लक्षणों का पता चल सकता है। शरीर के किसी भी हिस्से में गांठ होने पर कैंसर का खतरा हो सकता है। इसका पता लगाने के लिए एफएनएसी (फाइन नीडल एस्पिरेशन साइटोलॉजी) जांच आवश्यक होती है। इस जांच में एक बारीक सुई से गांठ की भीतरी सतह को कुरेदकर उसमें मौजूद कोशिकाओं को उसी सुई के जरिए निकाला जाता है। इसके बाद माइक्रोस्कोप से जांच की जाती है।
खेती में बढ़ा रासायनिक खाद्य का प्रयोग
खेत में ज्यादा उत्पादन के चक्कर में जमकर रासायनिक खाद्य का प्रयोग किया जा रहा है, जिसका असर अब लोगों के स्वास्थ्य पर साफ दिखाई दे रहा है। जहां पहले कैंसर जैसी महामारी के मरीज बहुत कम दिखाई देते थे। वहीं अब प्रतिदिन इस बीमारी की चपेट में लोग आ रहे हैं और अपनी जान गवां रहे हैं।
तंबाकू का ज्यादा सेवन भी कैंसर को दे रहा बुलावा
युवाओं में तंबाकू का अधिक सेवन करने से भी यह बीमारी बढ़ रही है। इनमें फेफड़ों, स्तन, बच्चेदानी, गले का कैंसर के रोगी भी है। कैंसर के बढ़ते प्रभाव के पीछे लोगों की बदलती जीवनशैली है, जिसका प्रभाव अब लोगों पर देखने को मिल रहा है।
जिले में कैंसर मरीजों के आंकड़ा
साल मरीज
2019-20 325
2020-21 226
2021-22 310
2022-23 433
2023-24 509
2024-25 266
नागरिक अस्पताल में एफएनएसी की जांच होती है। अगर कैंसर जैसे लक्षण दिखाई देते हैं तो रोहतक रेफर कर दिया जाता है।
डॉ. सर्बजीत थापर, नागरिक अस्पताल नारनौल।