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Mahendragarh-Narnaul News: सुई में धागा डाल कर जिंदगी को एक सूत्र में पिरोया

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फोटो 04 रेखा देवी
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नारनौल। बड़ी बहन को देख रेखा ने भी सिलाई का हुनर सीखा लेकिन तब ये नहीं पता था कि एक दिन यह हुनर उसके जीवन को पटरी पर लाने में उसका साथ देगा। शहर के केशव नगर में रहने वाली रेखा देवी ने परिस्थितियों के हाथों मजबूर होकर घर से ही सिलाई का काम शुरू किया। साथ ही 5 महिलाओं को भी राेजगार दिया है। इसी का नतीजा है कि अब हर माह 30 से 40 हजार की बचत हो जाती है।
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साल 1980 में एक जमींदार के घर में जन्मी रेखा 8 बहनें है। रेखा बचपन से ही अपनी बड़ी बहन को सिलाई करते देखती थी तो उनका भी सिलाई की ओर रुझान हो गया। उस वक्त उनको नहीं पता था कि उसका यही शौक एक दिन उनकी जिंदगी को बेहतर बनाने वाला है।
साल 1997 में नारनौल में शादी होकर आई रेखा के पति एक फर्नीचर की दुकान पर सेल्समैन का काम करते हैं। घर की माली हालत अच्छी नहीं होने के चलते कई बार बहुत सी चीजों के लिए बच्चों को ललचाते देखती थी।
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ऐसे में दो बच्चों की मां रेखा ने घर से ही सिलाई करना शुरू किया। हालांकि शुरू में काम इतना नहीं मिलता था लेकिन उसकी हाथों की सफाई देखकर जो भी उनसे कुछ सिलवाकर जाता। वह लौटकर उन्हीं के पास ही आता। ऐसे में धीरे धीरे काम बढ़ता गया और जीवन आसान होता चला गया।
किराये पर ली दुकान
रेखा ने घर के सामने ही साल 2000 में एक दुकान किराए पर ली। इस दौरान उन्होंने गरीब परिवार की 7 लड़कियों को मुफ्त में सिलाई सिखाई। आज रेखा के साथ 5 महिलाएं सिलाई का काम कर अपनी आजीविका चला रही हैं।
बेटे को बनाना है कामयाब
रेखा की एक बेटी व एक बेटा है और हाल ही में बेटी की शादी राजस्थान के झुंझुनू जिले में एक अच्छे परिवार में की है। बेटी भी सिलाई का काम बखूबी जानती है। बेटा पढ़ाई कर रहा है। रेखा का कहना है कि अब शहर में खुद का एक बड़ा बुटिक व बेटे को कामयाब होते देखना ही उसका मकसद है।
रेखा ने कुछ न कुछ सीखते रहने की दी सलाह
रेखा का मानना है कि लड़कियों को कुछ न कुछ सीखते रहना चाहिए क्योंकि हाथ का हुनर भले ही बहुत ज्यादा कमा कर न दे लेकिन किसी के आगे हाथ नहीं फैलाने देगा। ऐसे में आप खुद तो आत्मनिर्भर बनेंगी ही बल्कि परिवार के गुजर बसर में भी योगदान दे पाएंगी। साथ ही अन्य को रोजगार देकर उन्हें भी आत्मनिर्भर बनाने में अपना योगदान दे सकेंगी।
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