सावधान! आप नारनौल बस स्टैंड परिसर में जा रहे हैं तो थोड़ा संभल कर जाएं। 32 साल पहले बनी बस स्टैंड की इमारत जर्जर हो चुकी है और समय पर इसकी रिपेयरिंग नहीं हुई तो कभी भी बड़े हादसे का सबब बन सकती है। एक साल पहले ग्रांट जारी होने के बाद भी बस स्टैंड भवन रिपेयरिंग कार्य के लिए बाट जोह रहा है। भवन की रिपेयरिंग के लिए परिवहन विभाग ने राशि मंजूर कर ड्राफ्ट एक साल पहले पीडब्ल्यूडी भवन एवं निर्माण शाखा को भेज दिया था। इसके बावजूद रेनोवेशन कार्य की फाइल आगे नहीं बढ़ी है। रिपेयर न होने के कारण यहां के कर्मचारी और अधिकारी भी खुद असुरक्षित महसूस रहे हैं।
1983 में हुआ था भवन का निर्माण
बस स्टैंड का उद्घाटन 4 जून 1983 को तत्कालीन परिवहन मंत्री कर्नल राव राम सिंह ने किया था। उसके बाद से भवन की रिपेयरिंग का कार्य एक या दो बार ही आंशिक रूप से हुआ है। रिपेयर की ओर ध्यान नहीं देने से छत और दीवारें खस्ताहाल में हैं। दो साल पहले तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री ने बस स्टैैंड के जीर्णोद्धार के लिए 74.21 लाख रुपये की राशि मंजूर करवाई थी। 4 सितंबर 2014 को राशि का डीडी जीएम रोडवेज ने पीडब्ल्यूडी भवन एवं निर्माण शाखा के कार्यकारी अभियंता को भेज दिया था, मगर राशि जमा करवाने के बाद भी काम अभी तक शुरू नहीं हो पाया है।
छत का होना है रेनोवेशन
राशि से बस स्टैंड की छत का पुनर्निर्माण करवाना और बस स्टैंड के बूथों की संख्या बढ़ाना था। राशि को पीडब्ल्यूडी विभाग के पास पहुंचे एक साल दो माह बीतने के बाद भी यहां पर निर्माण तो दूर टेंडर प्रक्रिया भी शुरू नहीं हो पाई है। इस कारण लोगों की जान पर बन आई है।