सत्य की असत्य पर और अंधकार पर उजाले के विजय का प्रतीक विजय दशमी का पर्व मंगलवार को हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इसे लेकर शहर में दो प्रमुख जगहों पर रावण के पुतले के साथ उसके अहंकार का भी दहन हुआ। शोभा सागर तालाब पर 61 फीट और नई अनाज मंडी में 41 फीट ऊंचे रावण के पुतले जलाए गए। इससे पूर्व धार्मिक संगठनों द्वारा पर्व को लेकर झांकियां भी निकाली गई। भगवान श्रीराम ने जैसे ही रावण के पुतला में आग लगाई पूरा मैदान जय श्रीराम के जयकारे से गूंज उठा। इसके पूर्व राम-रावण के युद्ध का भी दर्शकों ने आनंद उठाया।
जिले के विभिन्न स्थानों पर कई दिनों से चल रही रामलीला के समापन अवसर पर मंगलवार को दो स्थानों पर रावण वध किया गया। विशालकाय दशानन के पुतले में जैसे ही आग लगी दर्शकों ने जय श्रीराम के जयकारे लगाने शुरू कर दिये। अधर्म पर धर्म की इस जीत को देखने के लिए भारी संख्या में भीड़ उमड़ी रही। इससे पूर्व नई अनाज मंडी व शोभा सागर तालाब पर दशहरा पर्व का मेला लगा। इस बार 61 व 41 फुट का रावण के पुतले जलाए गए। युद्ध का शुभारंभ भगवान राम की आरती-पूजन के बाद हुआ। विजयदशमी का पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत माना जाता है। यह त्योहार भाईचारे का प्रतीक है। सुरक्षा के लिए पुलिस प्रशासन ने कड़े प्रबंध किए हुए थे। पुलिस व जिला प्रशासन द्वारा आयोजन स्थलों पर पुलिसकर्मियों को भी तैनात किया गया था ताकि शांति व्यवस्था बनी रहे। किसी प्रकार की कोई अप्रिय घटना घटित न हो। इसके लिए अग्रिशमन विभाग को भी सतर्क रखा गया था ताकि आपात स्थिति में सहायता ली जा सके।
निकाली गई भव्य शोभायात्रा
शहर के विभिन्न क्षेत्रों में विभिन्न रामलीलाओं कमेटियों द्वारा बैंड बाजों के साथ शोभायात्राओं का आयोजन भी किया गया, जिसमें श्रीराम, सीता, लक्ष्मण व हनुमान का किरदार निभाने वाले कलाकार शामिल हुए। राम सेना भी इस शोभायात्रा में शामिल हुई। शहरवासियों ने इस शोभायात्रा का बड़ी ही गर्मजोशी के साथ स्वागत किया। चंदूवाड़ा रामलीला कमेटी द्वारा अनाजमंडी में ग्राउंड में रावण के पुतले का दहन किया गया। दूसरी ड्रामेटिक रामलीला की ओर से शोभासागर में रावण में दहन हुआ। इसके अलावा अन्य जगहों पर भी रावण दहन का कार्यक्रम हुआ। रावण के हाथ और सिर में विभिन्न रंगों की रोशनी लगाई गई थी। जो लोगों के विशेष आकर्षण का केंद्र होगी। विजय दशमी पर रावण दहन से पहले आतिशबाजी विशेष आकर्षण का केंद्र रही।