फोटो नंबर-13नारनौल के मोहल्ला संघीवाड़ा में नाले पर बने चबूतरों को तोड़ती जेसीबी मशीन। संवाद
नारनौल। शहर के मोहल्ला बावड़ीपुर से संघीवाड़ा तक पानी निकासी के लिए बने नाले से अतिक्रमण हटवाने के लिए वीरवार सुबह भारी पुलिस दल के साथ नगर परिषद की टीम पहुंची।
मोहल्ले में टीम को देखकर लोगों में अफरातफरी मच गई। कुछ लोगों ने तो घर के बाहर रखे सामान को उठाकर अंदर रखना शुरू कर दिया। नप की टीम में एक्सईएन सुंदर सिंह श्योराण, कार्यकारी अधिकारी दीपक गोयल व नप जेई प्रवीण आदि मौजूद रहे। मोहल्ले में भारी संख्या में पहुंची पुलिस को देखकर एक बार तो लोग समझ ही नहीं पाए कि क्या बात हो गई। इसके बाद जैसे ही बुलडोजर से नाले पर बने चबूतरों को नप कर्मचारियों ने तोड़ना शुरू किया तो लोगों को टीम के उद्देश्य की जानकारी हुई।
मोहल्ला बावड़ीपुर से संघीवाड़ा तक बने नाले में काफी समय से पानी की निकासी नहीं हो रही थी। पानी निकासी नहीं होने के कारण मोहल्ला बावड़ीपुर व बड़का कुआं के पास सड़कों पर गंदा पानी जमा रहता था। पानी के सड़क पर जमा रहने के कारण लोगों को आने -जाने में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था। नाले से पानी की निकासी को लेकर कई बार लोगों ने नगर परिषद में शिकायत भी की थी। इस नाले से पानी की निकासी का समाधान करने के लिए नप ने वीरवार को घरों के बाहर नाले पर बनाए गए चबूतरों को बुलडोजर से तोड़ दिया।
इंसेट
चबूतरों को तोड़ने से लोगों में आक्रोश
नगर परिषद द्वारा नाले पर बने चबूतरों को तोड़ने पर कुछ लोगों में इसके खिलाफ नाराजगी भी रही। लोगों का कहना था कि चबूतरों को तोड़ने से नाले में पानी की निकासी होना असंभव है। लोगों का कहना था कि नाले में पानी की निकासी न होने का बड़ा कारण इसमें जमा रहने वाली गंदगी है। इसलिए नगर परिषद को चाहिए कि वह इस नाले में बड़े पाइप डालकर इसे अंडरग्राउंड बनाएं। नाला अंडरग्राउंड बना देने से मच्छर कम पनपेंगे। यहां का वातावरण भी ठीक रहेगा। लोगों ने बताया कि घरों के बाहर चबूतरे इसलिए बनाए गए है क्योंकि यहां पहले मकान नीचे थे और बरसात के दिनों में यहां घुटनों से ऊपर पानी जमा हो जाता है। घरों में भी घुस जाता है। इसलिए मकानों को ऊंचा उठाकर चबूतरे बनाए गए हैं।
वर्जन-
घरों के बाहर चबूतरे बनाकर अतिक्रमण कर लिया गया था। इसके कारण नाले की सफाई ठीक से नहीं हो पाती थी। इसी कारण वीरवार को चबूतरों को तोड़ा गया है। इन चबूतरों के नीचे कूड़ा जमा हो जाता था। कर्मचारियों को परेशानी होती थी। अब चबूतरों के टूटने से नाले की सफाई आसानी से हो जाएगी। -सुंदरसिंह श्योराण, एक्सईएन नगर परिषद