मंडी अटेली। अटेली से बहरोड सड़क मार्ग पर 6 किलोमीटर की दूरी पर स्थित गांव बिहाली को 700 वर्ष पहले बिहारी सिंह गादोदिया ने बसाया था। उसी के नाम पर इस गांव का नाम बिहाली पड़ा। लगभग 5 हजार की आबादी वाले इस गांव में 3268 मतदाता अपने मत का प्रयोग करके अपना प्रतिनिधि चुनते हैं। गादोदिया गोत्र बाहुल्य गांव में लोगों की धर्म में आस्था भी बहुत है, जिसके चलते भगवान नृसिंह जी, ठाकुर जी, हनुमान, शिव भगवान का मंदिर स्थापित है। प्राचीन मंदिर बाबा सेवा दास की मान्यता तो पास के 20 से अधिक गांवों में है।
गांव में लगभग 30 फीसदी अनुसूचित जाति सहित ब्राह्मण व पिछड़ी जाति के लोग है। गांव में श्री कृष्ण बाल गोपाल गोशाला स्थापित है, जिसमें लगभग 2700 गोवंश निवास करते हैं। पहाड़ की तलहटी में हनुमान मंदिर बना हुआ है, जहां हर वर्ष 26 जनवरी को विशाल मेले, भंडारे तथा दंगल का आयोजन होता है। गांव में सैनिकों की संख्या भी सैंकड़ों के करीब है, स्वर्गीय धंशीराम परमवीर चक्र विजेता थे, तो शहीद सुनील कुमार दुश्मन को लोहा देते हुए वीरगति को प्राप्त हुए थे। इसके साथ ही मुरारी लाल भी शहीदों की सूची में शामिल हैं। आपसी भाईचारे में भी गांव की विशेष पहचान बनी हुई है।
सुविधाओं पर नजर डाली जाए तो राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, कन्या प्राथमिक पाठशाला, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, पंचायत भवन, आंगनबाड़ी केंद्र, लघु सचिवालय, जोहड़ व तालाब, हरिजन चौपाल, नंदी आरओ प्लांट, मुख्य चौपाल की समुचित व्यवस्था बनी हुई है। लेकिन सफाई कर्मचारियों के अभाव के चलते व्यवस्था चरमराई हुई है। जिसके चलते पानी निकासी के लिए बनाए गए नाले गंदगी से लबालब भरे हुए है। आबादी को देखते हुए यहां 6 सफाई कर्मचारियों की जरूरत महसूस की जा रही है। प्रशासन को समय रहते गांव में सफाई कर्मचारियों की संख्या में इजाफा देना चाहिए ताकि गांव साफ सुथरा बन सके।
गांव में विकास कार्य को बल दिया जा रहा है। गांव को स्वच्छ व सुंदर बनाए रखने, नशा मुक्ति तथा बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियानों को आगे बढ़ाने का प्रयास लगातार जारी है। ग्राम पंचायत अपने पंचों की सलाह मशविरा पर विकास कार्यों में जुटी है।
बीना देवी, सरपंच बिहाली।