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छह गांवों के 40 हजार लोगों की जिंदगी में 40 वर्ष बाद नहर में पानी लाकर ले आए वसंत

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गांव खायरा रोड पर खेत में लहराती सरसों की फसल। - फोटो : Narnol
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रिटायर्ड पुलिस इंस्पेक्टर राजेंद्र सिंह यादव ने अपने संघर्ष से छह गांवों के करीब 40 हजार लोगों के जीवन में वसंत ला दिया। पीने के पानी के लिए भी तरसने वाले दक्षिण हरियाणा के इन छह गांवों में करीब तीन हजार एकड़ से अधिक जमीन में हरियाली आ गई। बंजर हो रही गांव की जमीन में अब सरसों- गेहूं की खेती की जा रही है। तीन साल के लंबे संघर्ष से राजेंद्र सिंह यादव 18 किलोमीटर लंबी बसई डिस्ट्रीब्यूटरी का निर्माण कराने में सफल रहे।
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गांव आकोदा निवासी राजेंद्र सिंह यादव मध्यप्रदेश पुलिस के सब इंस्पेक्टर के पद से रिटायर होने के बाद वर्ष 2014 में अपने गांव आकर रहने लगे। यहां उन्हें पता लगा कि गांव में बसई डिस्ट्रीब्यूटरी तो है, लेकिन उसमें पिछले 35 साल से पानी नहीं आ रहा। इन 35 साल में गांव का भूजल स्तर 100 फीट से 400 फीट तक चला गया था। राजेंद्र सिंह ने आरटीआई से जानकारी जुटाई तो पता लगा कि नहर की सफाई पर लाखों रुपये खर्च हो रहा है। इसके बाद भी पानी नहीं आ रहा। बसई, आकोदा, खुडाना, खरकड़ा, बास, सेहलंग गांव को पानी के लिए तरसते देखकर राजेंद्र सिंह यादव ने सिंचाई विभाग , नहर विभाग, डीसी कार्यालय, सीएम विंडो तक सभी जगह शिकायत सौंपी। विधायक से लेकर मंत्री तक सभी को मांगपत्र सौंपा । तीन साल तक शिकायतें-मांगपत्र देने के बाद भी समाधान नहीं हुुआ तो राजेंद्र सिंह यादव ने नहर संघर्ष समिति बनाकर नहर किनारे ही धरना देना शुरू कर दिया। एक अप्रैल 2018 से धरना शुरू किया। चार दिन बाद अन्न त्याग दिया। 23 दिन तक अनशन पर बैठे। तात्कालिक मंत्री रामबिलास शर्मा ,सांसद चौधरी धर्मबीर सिंह मौके पर आंदोलन खत्म कराने पहुुंचे। संघर्ष समिति ने कहा कि नहर में पानी आने तक आंदोलन खत्म नहीं करेंगे। महापंचायत में एसडीएम ने पहुंचकर भरोसा दिलाया कि नहर का पुनरोद्धार कराया जाएगा। सीएम ने भी नहर के निर्माण का एलान किया तब आंदोलन को खत्म किया।
चार दशक बाद आया पानी
979 में बसई डिस्ट्रीब्यूटरी का निर्माण कराया था। निर्माण के बाद इस नहर में कभी पानी नहीं आया।
करीब 18 किलोमीटर लंबी नहर के लिए दिसंबर 2018 पर पुनरोद्धार का काम शुरू कराया गया। जिसमें 5.32 करोड़ रुपये खर्च कर नहर का निर्माण कराया गया। करीब चार दशक बाद 2019 में इस नहर में पानी आया।
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आंदोलन खत्म कराने दबाव से षड्यंत्र तक रचे
62 वर्षीय राजेंद्र सिंह के आंदोलन को खत्म कराने के लिए कई तरह के दबाव बनाए गए। परिवार , गांव, समाज के लोगों के जरिए अनशन तुड़वाने के लिए प्रयास कराए गए। नहर में बोरवेल का पानी डालकर धोखा देने षड्यंत्र रचा गया। अनशन समिति ने कहा कि नहरी पानी आने तक आंदोलन खत्म नहीं करेंगे।
छह गावं के तीन हजार एकड़ में लाई हरियाली
राजेंद्र सिंह के आंदोलन से दक्षिण हरियाणा के छह गांव की बंजर हो रही तीन हजार एकड़ जमीन पर हरियाली ला दी है। इन गांवों में अब सरसों, गेहूं की फसल लहलहा रही है। गांव में अब पेयजल की आपूर्ति भी शुरू हो गई है। इन छह गांव में करीब 40 हजार से अधिक की आबादी को फायदा हुआ है।
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