नारनौल। वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) बढ़ने से शहर की आबोहवा खराब हो गई है। रविवार को एक्यूआई 216 दर्ज किया गया। यह खराब श्रेणी में आता है। वायु प्रदूषण के चलते धुंध जैसा वातावरण रहा। लोगों को आंखों में जलन और खांस की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। प्रदूषण की स्थिति को देखते हुए ग्रैप -2 की पाबंदियां लागू की गई है। इसके बाद भी खुलेआम कूड़ा जलाया जा रहा है।
प्रदूषण बढ़ने से शहर की आबोहवा फिर से दूषित हो गई है जिससे धुंध सा छाया रहा। प्रदूषण के चलेत बाजारों और सड़कों पर निकलने वाले लोगों को आंखों में जलन, खांसी और गले में खराश की समस्याएं महसूस हुई। जिले में ग्रेप-2 की पाबंदियां लागू करते हुए कूड़ा जलाने पर प्रतिबंध लगाया गया है।
निर्माण स्थलों पर धूल से बचाव के तरीके अपनाने के निर्देश दिए गए हैं। पाबंदियों के बाद भी कई स्थानों पर खुले में कूड़ा जलाया जा रहा है, जिससे प्रदूषण और अधिक बढ़ रहा है। नगर परिषद द्वारा नियमित कूड़ा उठान न होने के कारण लोग मजबूरी में या लापरवाही वश कचरा सड़कों व खाली स्थानों पर जलाने लगे हैं।
इससे न केवल हवा में धुआं फैल रहा है, बल्कि आसपास के क्षेत्रों में बदबू और स्वास्थ्य संबंधी खतरे भी बढ़ रहे हैं। चिकित्सकों ने सलाह दी है कि प्रदूषण के प्रभाव से बचने के लिए लोग घर से बाहर निकलते समय मास्क और चश्मे का प्रयोग करें। साथ ही, बच्चों, बुजुर्गों और अस्थमा के मरीजों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।
एक्यूआई इसी तरह बढ़ता रहा और वायु गुणवत्ता में सुधार नहीं हुआ तो प्रशासन ग्रेप-3 लागू कर सकता है, जिसके तहत निर्माण कार्यों पर पाबंदी लग सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि प्रशासनिक प्रयासों के साथ-साथ नागरिकों को भी जिम्मेदारी दिखाते हुए प्रदूषण नियंत्रण में सहयोग करना होगा, ताकि शहर की हवा को स्वच्छ बनाया जा सके।
वर्जन-
एक्यूआई बढ़ने के कारण ग्रैप 2 की पाबंदियां लागू की गई हैं। इसके तहत कूड़ा जलाने पर प्रतिबंध है। कूड़ा नहीं जलाने के लिए लोगों को जागरूक किया जा रहा है।-अनुज नरवाल, एसडीओ,प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड।