फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

ब्लैक फंगस से शहर में पहली मौत

विज्ञापन
विज्ञापन
मोहल्ला सैैनीपुरा निवासी एक युवक की ब्लैक फंगस से मौत हो गई। जिले में ब्लैक फंगस से यह पहली मौत है। चार दिन पहले उसको रोहतक पीजीआई में एडमिट किया गया था जहां पर मंगलवार की सुबह उसकी मौत हो गई। परिजनों ने उसका दाह संस्कार कर दिया
विज्ञापन

मृतक के भाई मुकेश ने बताया कि उसका भाई रवि (30) हलवाई के साथ बतौर हेल्पर काम करता था। 28 मई को रवि रेवाड़ी एलर्जी की दवाई लेने गया था। चिकित्सक ने उसका शुगर चेक करवाया था। उसका शुगर उस दिन 430 था। शुगर की शिकायत उसको उसी दिन पता चली थी। अगले ही दिन शुगर 577 पहुंच गया तथा बीपी भी बहुत बढ़ गया था। बाद में उसको पेट में दर्द शुरू हो गया था। 31 मई को उसको नारनौल एक निजी अस्पताल में इलाज के लिए ले गए थे जहां से दवाई लेने के बाद वापस घर आ गए थे। परंतु रात को दवाइयों से आराम नहीं होने पर 1 जून को सुबह पांच बजे नारनौल दूसरे निजी अस्पताल में लेकर गए जहां पर वह चार दिन तक एडमिट रहा। इस दौरान उसको आराम भी नहीं मिला तथा आंखें मोटी-मोटी हो गई थीं। इस संबंध में उसने चिकित्सक से भी बातचीत की तो बाद में चिकित्सक ने एमआरआई की जांच करवाई। एमआरआई रिपोर्ट में ब्लैक फंगस की शिकायत बताई गई। इसके बाद चिकित्सक ने उसको रोहतक पीजीआई के लिए रेफर कर दिया। रोहतक में दोबारा से जांच की गई तो वहां भी जांच में ब्लैक फंगस निकलकर आया। चिकित्सक ने उसकी गंभीर हालत को देखते हुए आईसीयू वार्ड में एडमिट कर लिया। चार दिन एडमिट रहने के बाद मंगलवार की सुबह उसकी मौत हो गई। मृतक अविवाहित था।
निजी अस्पतालों में आ रहे हैं केस
नागरिक अस्पताल में ब्लैक फंगस के अब तक चार संदिग्ध केस आए हैं। लेकिन नारनौल और महेंद्रगढ़ के निजी अस्पतालों भी ब्लैक फंगस के संदिग्ध केस आ रहे हैं। अब तक विभिन्न अस्पतालों में दस से ऊपर केस आ चुके हैं। जिला अस्पताल में इसके ईलाज की कोई सुविधा नहीं होने की वजह से रोहतक पीजीआई रेफर करना पड़ रहा है। सरकार ने जिला महेंद्रगढ़ को रोहतक पीजीआई के अंडर दिया हुआ है।
विज्ञापन

ब्लैक फंगस के आंकड़ों का नहीं चल पा रहा पता
जिले में ब्लैक फंगस के सही आंकड़ों का पता नहीं चल पा रहा है। जिस प्रकार से कोरोना डेथ और डेंगू के लिए निजी अस्पतालों को सरकारी अस्पताल को रिपोर्टिंग करनी होती है, उस प्रकार की रिपोर्टिंग संदिग्ध ब्लैक फंगस मरीजों की नहीं हो रही। इस प्रकार सही आंकड़ों का पता नहीं चल पा रहा। जिला अस्पताल के रिकॉर्ड में पिछले दस दिन से चार संदिग्ध मरीज ही दर्ज है। लेकिन हकीकत यह है कि निजी अस्पतालों में ब्लैक फंगस सस्पेक्टिड मरीज आ रहे हैं। महेंद्रगढ़ एवं नारनौल में जानकारी अनुसार लगभग दस केस सामने आ चुके हैं।
प्राथमिक स्टेज पर पता लगाने पर बचाया जा सकता है मरीज
गोविंद नेत्रालय के वरिष्ठ नेत्र चिकित्सक डॉ. अविनाश शर्मा ने बताया कि ब्लैक फंगस नाक से इंटर करता है और उसके बाद यह साइनस में चला जाता है। साइनस से ऊपर आंखों में चला जाता है बाद में यह दोनों आंखों के बीच के रास्ते से आगे बढ़ता हुआ दिमाग में चला जाता है जो बहुत खतरनाक होता है। उन्होंने बताया कि नाक में दिक्कत होने पर तुरंत ईएनटी के पास जांच करवा लेनी चाहिए। आंखों तक पहुंचने पर स्थिति गंभीर हो जाती है। मरीज को बचाने के लिए आंख को निकालना ही पड़ता है।
महेंद्रगढ़ में ब्लैक फंगस की किसी की मौत हुई है यह मेरी जानकारी में नहीं है। अब तक चार संदिग्ध केस यहां से रोहतक पीजीआई के लिए रेफर किए गए हैं। निजी अस्पताल संचालक उनको रिपोर्ट नहीं कर रहे इसके लिए सरकार को लिखा गया है।
विज्ञापन

-डॉ. अशोक कुमार, सिविल सर्जन,महेंद्रगढ़।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें