बीडीपीओ कार्यालय पर विरोध जताने पहुंचे ग्रामीणों ने बताया कि गांव के सरपंच ने जिस व्यक्ति को बोली छोड़ी है, उसने पहले ही जमीन पर बाजर बो रखा था। इसलिए नीलामी में सरपंच की मिलीभगत साफ दिखती है।
ग्रामीणों ने बताया कि पंचायती भूमि की बोली तो 7 मई को लगाई गई है, जबकि बाजर तो एक माह से पहले ही बीज दिया था। गांव के पूर्व सरपंच रामचंद्र, जगपाल सिंह, भंवर सिंह, बाबूलाल, उदय राम, विक्रम सिंह, सुजान सिंह, रमेश कुमार, प्रभाती लाल, प्रभू सिंह नंबरदार, रमेश चंद पंच, शकुंतला पंच, वेदप्रकाश पंच, विक्रम सिंह जिला पार्षद, शेर सिंह मनोहर लाल, गजे सिंह, नरेश कुमार, हजारीलाल, कैलाश आदि लोग दोबारा बोली लगवाने को लेकर उपायुक्त से मिल चुके है।
ग्रामीणों ने बताया कि बीडीपीओ के पास यह शिकायत लेकर तीन दिन से आ रहे हैं, लेकिन बीडीपीओ कार्यालय में मिलते ही नहीं हैं। ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि गांव की पंचायत ने न तो बोली लगाने की मुनादी करवाई और न ही गांव के लोगों को बोली के बारे में बताया।
सरपंच ने अपने-अपने नजदीकी लोगों को बुलाकर कुएं पर ही बैठकर नाममात्र रुपये में बोली छोड़ दी। 22 एकड़ भूमि सिर्फ 1.07 लाख रुपये पर छोड़ दी गई है। यह बोली कम से कम तीन लाख तक छूटनी चाहिए थी। इस संबंध में एसीपीओ करतार सिंह से बात की गई तो उन्होंने बताया कि इस प्रकार की जानकारी उनको ग्रामीणों से मिली है।
अगर पंचायत भूमि में पहले से ही फसल बोई हुई है तो सरासर गलत है। इसका मौका देखकर आगामी कार्रवाई की जाएगी।