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Mahendragarh-Narnaul News: बच्चों की आंखों को लगी मोबाइल की नजर

Sun, 12 May 2024 02:06 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
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फोटो नंबर-17 नागरिक अस्पताल नारनौल।
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नारनौल। जिस समय बच्चों के खेलने कूदने की उम्र है, उस समय अस्पतालों में चक्कर लगा रहे हैं। इसके पीछे घंटों भर मोबाइल को देखना है। इसके बाद धीरे-धीरे दृष्टि कमजोर होती चली जाती है और चश्मे लग जाते हैं। इसके अलावा दिनभर मोबाइल देखने की वजह से शरीर भी समय पर ग्रोथ नहीं कर पाता है। नारनौल के नागरिक अस्पताल में प्रतिदिन तीन-चार साल के बच्चों को अभिभावक लेकर पहुंच रहे हैं, जिनकी उम्र 4 से 8 साल के बीच है।
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इसके अलावा आनलाइन घंटों तक कोचिंग क्लास लगने से भी परेशानी बढ़ती जा रही है। पहले बच्चे सुबह-शाम खेलने के लिए पार्क व अन्य स्थानों पर जाते थे। अब स्कूल से आते ही मोबाइल देखना शुरू हो जाता है। इसकी वजह से बच्चों को विटामिन-डी भी प्रर्याप्त रूप से नहीं मिल पाती है और आंखों पर असर पड़ना शुरू हो जाता है। बदलते दौर के साथ मोबाइल जीवन का एक अहम हिस्सा बन गया है। इसके ज्यादा इस्तेमाल से आंखें प्रभावित हो रही है। अब बच्चे भी आसानी से दूर की चीजों को नहीं देख पा रहे हैं। समय से चिकित्सक को नहीं दिखाने पर बच्चों को छोटी उम्र में ही चश्मा लग रहा है। लगातार मोबाइल देखने से बच्चों में ड्राइनेस की समस्या ज्यादा देखने को मिल रही है। इसके अलावा बच्चे निकट दृष्टि दोष का भी शिकार हो रहे हैं। क्योंकि बंद कमरे में मोबाइल से आनलाइन पढ़ने से आंखों की मांसपेशियों में खिंचाव होता है।



4 से 8 साल के बच्चों को अभिभावक अस्पताल लेकर रहे पहुंचे


नारनौल के नागरिक अस्पताल की ओपीडी प्रतिदिन करीब 150 रहती है। इसमें 4 से 8 साल के बीच के बच्चे करीब 3-4 प्रतिदिन पहुंचते हैं। वहीं इससे अधिक उम्र के बच्चे भी समस्या लेकर पहुंचने वाले बच्चों की संख्या बढ़ी है। वहीं एक माह में 80 से 90 बच्चे आंखों की समस्या लेकर पहुंचते हैं। जिनकी मोबाइल की वजह से आंखें कमजोरी हो गई है।
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मोबाइल का अधिक प्रयोग बच्चों को कर रहा बीमार
मोबाइल का अधिक प्रयोग करने से बच्चों में अनेक प्रकार के बदलाव देखने को मिल रहे हैं। उनमें चिड़चिड़ापन, नींद में कमी, भूख न लगना, एकाग्रता में कमी, मोटापा, याददाश्त कमजोर होना, पढ़ाई में दिलचस्पी न लेना जैसी समस्याओं से ग्रसित हो रहे हैं। आने वाले समय में इसके परिणाम और भी गंभीर हो सकते हैं।



ऐसे करें बचाव



- बच्चों को मोबाइल खेल कूद के लिए प्रेरित करे।



- कंप्यूटर, टीवी या मोबाइल देखते समय उचित दूरी बना कर रखें।



- दिन में तीन-चार बार अपनी आंखों को ठंडे पानी से अच्छी तरह धोएं।



- धूप या किसी धूल-मिट्टी वाली जगह पर जाएं तो चश्मा पहनें।



- समय-समय पर आंखों का चेकअप कराते रहें।



-हरी सब्जियां का सेवन अधिक से अधिक करे।



मोबाइल की लत बच्चों की आंखों पर बुरा असर डाल रही है। नागरिक अस्पताल में प्रतिदिन 4 से 8 साल के बच्चे भी आंखों की समस्या को लेकर पहुंच रहे हैं। इसके पीछे मोबाइल घंटों तक देखना भी प्रमुख कारण है। लगातार मोबाइल देखने से सिर दर्द जैसी समस्या भी सामने आ रही है।
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नीरू यादव, नेत्र रोग विशेषज्ञ नागरिक अस्पताल नारनौल।
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