जम्मू में रविवार की शाम को पेट्रोलिंग के दौरान लैंड स्लाइड होने से नांगल चौधरी के गांव नांगल पीपा निवासी सीआरपीएफ के सिपाही सहित एक डीआईजी शहीद हो गए। मंगलवार सुबह शहीद सिपाही का पार्थिव शरीर गांव नांगल पीपा पहुंचा। पार्थिव शरीर के साथ आए सैनिकों व स्थानीय पुलिस ने शहीद को सलामी देकर उनका अंतिम संस्कार किया। हादसे से पूरे गांव में मातम छाया हुआ है और गांव में किसी भी घर में चूल्हा तक नहीं जला।
जानकारी के अनुसार नांगलव पीपा निवासी नवीन पुत्र लीलाराम सीआरपीएफ में बतौर सिपाही 2014 में भर्ती हुए थे। वह सीआरपीएफ की 144 बटालियन में श्रीनगर में तैनात थे। रविवार की शाम सीआरपीएफ डीआईजी शैलेंद्र सिंह व ड्राइवर नवीन कुमार अपने काफिले के साथ पेट्रोलिंग करते हुए जम्मू से श्रीनगर जा रहे थे। इसमें एक गाड़ी पीछे और एक गाड़ी आगे चल रही थी। जैसे ही काफिला खूनी नाले के पास पहुंचा, अचानक पहाड़ से लैंड स्लाइड हो गई। इससे डीआईजी की गाड़ी चट्टान की चपेट में आ गई व मौके पर ही डीआईजी शेलेंद्र सिंह व सिपाही नवीन शहीद हो गए। हादसे की जानकारी मिलते ही गांव में शोक पसर गया। मंगलवार की सुबह शहीद का पार्थिव शरीर गांव में पहुंचा। शहीद की अंतिम यात्रा में थाना प्रभारी संतोष कुमार व साथ आए पुलिस कर्मचारियों ने राजकीय सम्मान के साथ सशस्त्र सलामी दी। गमगीन माहौल में शहीद नवीन का अंतिम संस्कार पैतृक गांव नांगल पीपा में किया गया। बड़े भाई ने शहीद नवीन को मुखाग्नि दी। शहीद के मात-पिता, पत्नी व परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। नवीन के शहीद होने की खबर सुनकर पूरे गांव में शोक पसर गया। नांगल चौधरी विधायक डॉ. अभय सिंह यादव, पूर्व चेयरमैन प्रवीण चौधरी, दयाराम यादव, विनोद भील, राजाराम गोलवा व समस्त ग्रामीण सहित आसपास के गांवों के काफी संख्या में लोग शहीद की अंतिम यात्रा में मौजूद थे।
दो महीने का बेटा छोड़ गए नवीन
शहीद सिपाही नवीन चार भाइयों में सबसे छोटे थे। उनका एक भाई दिल्ली पुलिस में कार्यरत है व दो भाई खेतीबाड़ी करते हैं। नवीन 2014 में सीआरपीएफ में बतौर सिपाही भर्ती हुए थे। उनकी करीब तीन साल पहले शादी हुई थी। नवीन के एक बेटी करीब डेढ़ साल की व एक बेटा करीब दो महीने का है। नवीन हाल ही में 29 अक्तूबर को घर पर छुट्टी काट कर वापस नौकरी पर गए थे।
पिता को बेटे की शहादत पर गर्व
गांव के सरपंच प्रतिनिधि अमर सिंह ने कहा कि गांव का एक नौजवान देश की रक्षा के लिए सीमा पर पहरा देते हुए हमें छोड़कर चला लगा, इसका हमें गर्व है। लेकिन, अफसोस की बात यह है कि शहीद के अंतिम संस्कार में जिला प्रशासन की तरफ से कोई भी अधिकारी नहीं पहुंचा। वहीं पिता ने भी बेटे की शहादत पर गर्व जाहिर किया। उन्होंने कहा कि वे अपने पोते को भी सेना में भर्ती करवाकर देश की सेवा के लिए भेजेंगे। भाई देवेंद्र ने बताया कि दो दिन पहले नवीन से बातचीत हुई थी। इसके बाद सोमवार को इसकी जानकारी मिली। भाई चार साल से श्रीनगर में तैनात थे।