नारनौल। असत्य पर सत्य और अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक पर्व दशहरा वीरवार को धूमधाम मनाया गया। लोगों ने घरों में शस्त्र पूजन किया। रावण की नाभि में तीर लगते ही भगवान राम के जयकारे लगने लगे।
वहीं शहर में आयोजित रामलीलाओं के पात्रों ने शोभायात्रा निकालकर विभिन्न स्थानों पर रावण दहन किया। श्री धार्मिक रामलीला चांदुवाड़ा ट्रस्ट ने श्री सनातन धर्म सभा के सहयोग से एएसडी स्कूल से भगवान राम की शोभायात्रा निकाली। शोभायात्रा में भगवान सूर्य नारायण का डोला आकर्षण का केंद्र रहा। परंपरा अनुसार यह शोभायात्रा पहले सूर्य नारायण मंदिर पहुंची। जहां भगवान सूर्य की पूजा कर उन्हें साथ लिया गया।
शोभायात्रा में भगवान राम की सेना, रावण और उसकी सेना भी शामिल रही। यह शोभायात्रा आजाद चौक, मेहता चौक से होता हुआ नई अनाज मंडी पहुंचा। वहां रामलीला मंचन के दौरान राम-रावण संवाद हुआ, जिसके बाद दोनों के बीच भयंकर युद्ध का दृश्य प्रस्तुत किया गया और अंत में अधर्म का प्रतीक रावण वध किया गया।
इसी क्रम में 51 फीट ऊंचे रावण के पुतले का दहन किया गया। इस दौरान आतिशबाजी और रंग-बिरंगी रोशनी ने लोगों का मन मोह लिया। भगवान सूर्य नारायण व भगवान राम की गौड़ ब्राह्मण सभा आदि सामाजिक, धार्मिक व व्यापारिक संगठनों ने बाजार में आरती की। वहीं दूसरी ओर श्री कृष्णा ड्रामेटिक क्लब मंच पर चल रही रामलीला में भगवान नारायण सेवा संस्था ने शोभायात्रा निकाली। इसका शुभारंभ पुल बाजार से हुआ।
इसमें लंकापति रावण अपनी सेना सहित आगे चल रहे थे जबकि भगवान राम व उनकी सेना भव्य रथों पर सवार होकर पीछे-पीछे आ रही थी। शोभायात्रा पुल बाजार से निकलकर आजाद चौक, किला रोड और बहरोड़ रोड होते हुए शोभासागर पहुंची। यहां मंचन के दौरान राम-रावण संवाद के पश्चात धर्म-अधर्म के युद्ध का चित्रण किया गया। युद्ध के अंत में रावण पराजित हुआ और उसके पुतले का दहन किया गया।
दोनों ही स्थानों पर आयोजित रावण दहन के समय बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों ने उत्साहपूर्वक पर्व का आनंद लिया। आतिशबाजी व सजावट से पूरा वातावरण उल्लासमय बना रहा।