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चिकित्सकों ने पशुपालकों को दी थनैला रोग के बचाव की जानकारी

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हरियाणा पशु विज्ञान केंद्र और केंद्रीय भैंस अनुसंधान केंद्र हिसार द्वारा थनैला रोग के बचाव पर पशुपालकों को जागरूक करने हेतु पशुपालक सेमिनार का आयोजन किया गया। इस सेमिनार का आयोजन डॉ. देवेंद्र यादव और डॉ. ज्योति शुंठवाल द्वारा किया गया। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता केंद्रीय अनुसंधान केंद्र हिसार के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. प्रेम सिंह यादव, डॉ. दीक्षित, डॉ. सज्जन सिंह अहलावत और डॉ. सुदर्शन उप मंडल अधिकारी पशुपालन विभाग थे।
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डॉ. दीक्षित ने पशुपालकों को थनैला रोग से होने वाले आर्थिक नुकसान का उदाहरण देते हुए बताया कि यह रोग आज के दिन डेयरी उद्योग को सबसे ज्यादा हानि पहुंचाने वाला हैं। यह रोग बहुत सारे जीवाणुओं से होता हैं इस रोग का कोई टीकाकरण भी उपलब्ध नहीं हैं, जो इस रोग को और खतरनाक बनता हैं। डॉ. सजन सिंह ने पशुपालकों को थनैला के विभिन्न खाद्य जनित कारणों से पशुपालकों को अवगत करते हुए उनके बचाव और समाधान के बारे में जागरूक किया।
उन्होंने बताया की कैसे पशुओं की खान पान की अनियमितताओं से पशु इस रोग से ज्यादा संवेदनशील बन जाते हैं। उन्होंने पशु आहार में खनिज लवणों का महत्व बताते हुए पशुपालकों को हर पशु को खनिज मिश्रण देने के लिए प्रोत्साहित किया। डॉ. प्रेम सिंह ने हरियाणा पशु विज्ञान के वैज्ञानिकों के इस कार्यक्रम के लिए किए प्रयासों को सराहते हुए बताया की पशुपालकों को यहां स्थित दुग्ध प्रयोगशाला की सुविधाओं का भरपूर लाभ लेना चाहिए और जल्द से जल्द अपने पशुओं का दूध का परीक्षण करवा कर इलाज शुरू करना चाहिए। समारोह में परीक्षण ले रहे पशुपालकों को लुवास विश्वविद्यालय, हिसार की तरफ से प्रमाण पत्र भी वितरित किए गए।
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