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जिले में नहीं लगेगा पशु मेला, बाहरी पशुओं की गतिविधियों पर रहेगी रोक

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लघु सचिवालय में जिले में लंपी रोग को लेकर समीक्षा बैठक की गई। बैठक में डीसी डॉ. जेके आभीर ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अभी पशुओं के मूवमेंट पर पूरी तरह से रोक रहेगी तथा जिला में पशुओं का मेला भी नहीं लगेगा। डीसी ने आम नागरिकों से भी आह्वान किया है कि वे किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान ना दें। पशु चिकित्सक के अनुसार लंपी रोग से पीड़ित पशुओं का दूध कोई नुकसान नहीं करता। दूध को इंसान उबालकर ही पीते हैं। ऐसे में दूध में किसी प्रकार की नुकसानदायक चीज नहीं होती।
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डीसी ने निर्देश दिए कि पशु पालक विभाग द्वारा जारी हिदायतों की पालना करें। गोशालाओं में जैव सुरक्षा के उपाय अपनाए जाएं। बाहरी व्यक्ति और पशुओं के आवागमन पर प्रतिबंधन, गोशालाओं में मक्खी मच्छर आदि बाहरी परजीवियो के नियंत्रण के लिए साफ सफाई, कीटनाशक दवाओं का उचित प्रयोग के साथ साथ अन्य उपायों जैसे की बीमारियों से लड़ने के प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए खनिज मिश्रण का उपयोग करें। डीसी ने निर्देश दिए कि शहरी क्षेत्रों में नगर परिषद व नगर पालिका तथा ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायत विभाग के अधिकारी सक्रिय रहें। जहां भी इस रोग से पशुओं की मौत की सूचना मिले तो तुरंत उसको सरकार की गाइड लाइन के अनुसार दफनाने का कार्य किया जाए।
59 हजार गोधन का किया जा चुुका है टीकाकरण
उन्होंने बताया कि लंपी रोग से बचाव के लिए जिला के सभी गोधन का वैक्सीनेशन हो चुका है। जिला में 59 हजार गोधन का बचाव रोधी टीकाकरण हो चुका है। कुछ पशु बाहरी राज्यों से आए हुए हैं। यह इंजेक्शन 4 माह से अधिक उम्र के पशु को ही लगाया जाता है। जिस पशु को इस रोग के लक्षण है उसे यह इंजेक्शन नहीं लगाया जाता। बैठक में एसडीएम नारनौल मनोज कुमार, एसडीएम कनीना सुरेंद्र कुमार, नगराधीश डॉ मंगलसेन तथा उपनिदेशक पशुपालन डॉ. नसीब सिंह के अलावा अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे।
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ये हैं हेल्पलाइन व कंट्रोल रूम नंबर
डीसी डॉ. जयकृष्ण आभीर ने बताया कि बताया कि लंपी रोग की रोकथाम के लिए लुवास की ओर से हेल्पलाइन नंबर जारी किया है। कोई भी पशुपालक 9300000857 तथा 9485737001 पर इस बारे में जानकारी हासिल कर सकता है। इसके अलावा मृत पशुओं की सूचना के लिए कंट्रोल रूम नंबर 01282-250221 पर सूचना दी जा सकती है।
परजीवियों पर नियंत्रण करें पशुपालक
पशुपालन विभाग के उपनिदेशक डॉ. नसीब सिंह ने बताया कि लंपी रोग परजीवियों से भी संक्रमित पशुओं से स्वस्थ पशु में फैलता हैं। ऐसे में जरुरी हैं की रोग के गोवंश में इस रोग से बचाने के लिए इन परजीवियों पर नियंत्रण करें। पशुपालक चुने व फिटकरी का उचित उपयोग करें। नीम के पानी का भी प्रयोग कर सकते हैं। पशुपालक 1 प्रतिशत फोर्मलिन या ब्लीचिंग पाउडर (2-3 प्रतिशत) जीवनु-नाश्क स्प्रे का प्रयोग कर सकते हैं। इसके साथ साथ ही गोशाला में इस रोग को फ़ैलाने में सहयोगी मक्खी, मच्छर, चिचड़ आदि न पनपे, इसके लिए पानी व गंदगी का जमाव न होने दें। लक्षण दिखने पर पशु को तुरंत आइसोलेट करें। पड़ोसी राज्यों से यदि कोई पशु गोशाला में आता भी हैं तो उसे अलग से निगरानी बाड़े में रखे। साथ ही गोशाला में पशुओं में यदि लंपी रोग के लक्षण जैसे तेज बुखार, आंख-नाक से पानी आना, शरीर में विशेष प्रकार की गांठे बनना आदि दिखाई दें तो उसे जल्द से जल्द अलग करना चाहिए ताकि यह रोग स्वस्थ पशुओं में न फैले व चिकित्सीय सलाह लें।
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