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डीसी की टिप्पणी से बवाल

Tue, 08 Sep 2015 12:41 AM IST
नारनौल/महेंद्रगढ़
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क्षतिग्रस्त सड़क मार्ग ठीक कराने की मांग करने पहुंचीं मुकंदपुरा गांव की छात्राओं पर बृहस्पतिवार को डीसी द्वारा की टिप्पणी ने सोमवार को बवाल करा दिया। आक्रोशित ग्रामीणों ने सुबह सात बजे नारनौल- जयपुर हाईवे पर जाम लगाकर नारेबाजी की। चार घंटे तक लगे जाम को खुलवाने में प्रशासन के पसीने छूट गए।
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इस दौरान पुलिस ने ग्रामीणों पर लाठियां भांजी और आंसू गैस के गोले छोड़े। जवाब में ग्रामीणों ने भी पुलिस कर्मियों पर पथराव किया। इससे पुलिस बस सहित तीन वाहनों के शीशे टूट गए। बाद में मौके पर पहुंचे डीएसपी, एसडीएम और सीटीएम ने ग्रामीणों को समझा बुझाकर जाम खुलवाया। बवाल में पांच पुलिसकर्मी घायल हो गए, जबकि कई ग्रामीण चोटिल हो गए।

ग्रामीणों ने बताया कि नारनौल से टहला मुकुंदपुरा गांव की ओर जाने वाली सड़क कई साल से टूटी है। इस सड़क से नारनौल विभिन्न स्कूलों में साइकिलों पर आने वाले विद्यार्थियों को परेशानी होती है। छात्राओं को इस सड़क से स्कूल पहुंचने में एक से डेढ़ घंटा लग जाता है।
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इसी समस्या को लेकर गांव मुकुंदपुरा की कुछ छात्राएं बृहस्पतिवार को उपायुक्त अतुल कुमार से मिलीं थी। ग्रामीणों के अनुसार, उस दिन जब छात्राओं ने उपायुक्त से कहा कि कुछ छात्राएं सड़क ठीक न होने के कारण पढ़ाई छोड़कर घर बैठ गई। इस पर उपायुक्त ने छात्राओं को यह कह दिया था कि तुम भी घर बैठ जाओ। इसके बाद छात्राएं परेशान हैं। छात्राओं का कहना है कि जिला उपायुक्त ही अगर ऐसा कहेंगे तो कैसे समस्याओं का समाधान होगा। इसी बात से नाराज होकर ग्रामीणों ने सुबह करीब सात बजे टहला मोड़ पर नारनौल- जयपुर हाईवे को जाम कर दिया। जाम के कारण इस मुख्य मार्ग के दोनों ओर कई किलोमीटर तक वाहनों की लंबी कतारें लग गई।

डीसी ने की थी यह टिप्पणी
ग्रामीणों के अनुसार, बृहस्पतिवार को जब छात्राओं ने उपायुक्त से कहा कि कुछ छात्राएं सड़क ठीक न होने के कारण पढ़ाई छोड़कर घर बैठ गई तो इस पर उपायुक्त ने छात्राओं को यह कह दिया था कि तुम भी घर बैठ जाओ। इस बात से छात्राओं और उनके परिजनों में आक्रोश था। ग्रामीणों ने बताया कि दो दिन की छुट्टी होने के चलते वह विरोध नहीं जता सके। सोमवार को प्रशासन के खिलाफ आक्रोश जताया गया।

पुलिस बल ने पहुंचते ही भांजी लाठियां
जाम की सूचना मिलने के बाद तहसीलदार रतनलाल, एसएचओ शहर रमेश कुमार और ट्रैफिक पुलिस इंचार्ज वीणा राणा मौके पर पहुंचे। उन्होंने ग्रामीणों को समझाया कि वे लोक निर्माण विभाग के एक्सईएन को बुलाकर सड़क जल्दी ठीक करा देंगे, मगर उनकी बात ग्रामीणों ने नहीं मानी तथा वे उपायुक्त को बुलाने की बात पर अड़े रहे।
करीब दो घंटे तक ग्रामीण नहीं माने तो मौके पर भारी पुलिस बल पहुंच गया। पुलिस के जवानों ने बस से उतरते ही ग्रामीणों पर लाठियां भांजनी शुरू कर दी, जिससे ग्रामीण भाग खड़े हुए। बाद में ग्रामीणों ने खेतों में जाकर पुलिस पर पथराव कर दिया। इससे पुलिस की बस व दो अन्य गाड़ियों के शीशे टूट गए। वहीं ग्रामीणों की ओर से पथराव होता देख पुलिसकर्मी भी पीछे हट गए। उन्होंने ग्रामीणों पर आंसू गैस के गोले छोड़े।

आंसू गैस के गोले छोड़ने के बाद फिर जाम पर बैठे ग्रामीण
आंसू गैस और लाठीचार्ज होने के बाद मौके पर पहुंचे डीएसपी ने ग्रामीणों को समझाया, जिसके बाद पुलिसकर्मी व ग्रामीणों के बीच करीब 15 मिनट की झड़प भी शांत हो गई। वहीं ग्रामीण फिर से बैठ गए। इसके बाद पहुंचे आला अधिकारियों ने ग्रामीणों को समझा बुझाकर जाम खुलवाया।

पांच पुलिसकर्मी घायल, ग्रामीणों को लगी चोट
बवाल में पांच पुलिस कर्मी घायल हो गए। वहीं कई ग्रामीणों को भी चोटें आई हैं। घायलों में पुलिस कर्मी मोनू कुमार को छोड़कर अन्य किसी की भी हालत इतनी गंभीर नहीं हुई कि उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़े।  लोगों द्वारा पथराव किए जाने के कारण पुलिस बस के चारों ओर से शीशे टूट गए। वहीं एक ट्रक तथा दो अन्य वाहनों के भी शीशे इससे टूट गए।

पुलिस और मीडियाकर्मी का कैमरा टूटा
घटना की कवरेज करने गए मीडिया कर्मियों को भी खासी परेशानी हुई। एक इलेक्ट्रिक चैनल के पत्रकार का कैमरा टूट गया तथा मौके पर पुलिस कर्मी का कैमरा भी टूट गया।

चार घंटे जाम से लोग परेशान
करीब चार घंटे लगे इस जाम के कारण इस अति व्यस्त मार्ग के दोनों ओर काफी लंबी लाइनें लग गई। जिसके इस मार्ग से स्कूल आने जाने वाले बच्चों के अलावा जयपुर से नारनौल व नारनौल से जयपुर की ओर आने-जाने वाले लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। वहीं जाम में फंसी गाडिय़ों को निकलने में भी काफी समय लगा।

सड़क पर पैचवर्क कराने का आश्वासन दिया
पथराव, लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले छोड़ने की घटना के बाद मौके पर पहुंचे एसडीएम महेश कुमार और सीटीएम रोहित यादव ने लोगों को और ग्रामीणों को समझाबुझाकर जाम खुलवाया। अधिकारियों ने ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि रोड पर पैचवर्क का काम जल्द शुरू हो जाएगा तथा तीन माह बाद यह रोड दुबारा से बना दिया जाएगा। जिसके बाद ही ग्रामीण दोपहर करीब 12 बजे शांत हुए तथा उन्होंने जाम हटाया। इस घटनाक्रम के चलते एसएचओ, डीएसपी, तहसीलदार, सीटीएम व एसडीएम समेत लगभग पूरा प्रशासन मौके पर पहुंच गया। सीटीएम ने ग्रामीणों को बताया कि उपायुक्त के कहने का अर्थ कुछ और था जबकि इसका अर्थ ग्रामीण अलग निकाल रहे हैं। उन्होंने ग्रामीणों को संतुष्ट कर जाम खुलवाया।
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