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सुनो सरकार यहां है एंबुलेंस की दरकार

Mon, 04 Apr 2016 12:00 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला
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एंबुलेंस की दरकार - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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जिले में स्वास्थ्य सेवाएं बेपटरी हो गई है। कहीं चिकित्सकों की कमी तो कहीं एंबुलेंस की कमी से लोगों को परेशान होना पड़ रहा है। कांग्रेस सरकार के समय में स्वास्थ्य मंत्री भी इसी जिले के थे लेकिन इसका जिले को लाभ नहीं मिल सका। प्रदेश में बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं का दम भरने वाली भाजपा सरकार से भी लोगों को राहत नहीं मिल पा रही है। इस समय लगभग 10 लाख की जनसंख्या वाले जिले में मात्र 19 एंबुलेंस हैं जिनमें से 7 एंबुलेंस खराब हो चुकी हैं जबकि 2 एबुलेंस कंडम हैं। मात्र 10 एंबुलेंस के सहारे पूरा जिला चल रहा है। वर्तमान में 1 लाख लोगों पर मात्र 1 एंबुलेंस हैं। ऐसे में हर रोज मरीजों और घायलों को काफी परेशानी उठानी पड़ती हैं और उन्हें निजी एंबुलेंस का सहारा लेना पड़ता है।
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हर रोज आती हैं 70 -80 कॉल
 बता दें कि एंबुलेंस न. 102 पर हर रोज 70 से 80 कॉल आती हैं लेकिन जिले में 10 एंबुलेंस ही ठीक होने के कारण बाकी मरीजों, गर्भवती महिलाओं और घायलों को निजी एंबुलेंस का ही सहारा लेना पड़ता है। निजी एंबुलेंस चालक मरीजों से 10 रुपये प्रति किलोमीटर की हिसाब से वसूलता है। जिले में चिकित्सा सुविधा अभाव के कारण बहुत से घायलों को रोहतक या गुड़गांव रेफर किया जाता है दोनों ही स्टेशन महेंद्रगढ़ से 100 से 110 किलोमीटर की दूरी पर पड़ते हैं। इतनी दूरी का निजी एंबुलेंस चालक घायलों के परिजनों से लगभग दो से ढाई हजार रुपये वसूलतेे हैं। जबकि सड़क हादसों में घायल, प्रसूति के लिए व बीपीएल धारकों के लिए सरकारी एंबुलेंस निशुल्क हैं। अन्य मरीजों के लिए सात रुपये प्रति किलोमीटर के हिसाब से किराया जाता है।

महेंद्रगढ़ की है यह स्थिति:
महेंद्रगढ़ का अस्पताल 55 बेड का है, पर डाक्टरों की कमी के अलावा यहां पर अन्य सुविधाओं की भी दरकार है। बात एंबुलेंस की करते हैं। अस्पताल के पास केवल दो एंबुलेंस हैं। इनमें एक छोटी गाड़ी और दूसरी बड़ी। हालांकि, प्रबंधन द्वारा दोनों ही गाड़ियों में आकस्मिक किट लगाना अनिवार्य किया गया है, लेकिन बड़ी बात यह है कि बड़ी गाड़ी पुरानी होने के कारण कई बार खराब खड़ी रहती है। ऐसे में केवल एक ही गाड़ी बच जाती है। बता दें कि महेंद्रगढ़ अस्पताल में रोजाना 300 से 400 मरीज आते हैं। क्योंकि यहां से नारनौल, रेवाड़ी और पीजीआई रोहतक और राजस्थान के अस्पताल सभी की दूरी ज्यादा है। इसलिए आसपास के लोग महेंद्रगढ़ अस्पताल में आते हैं। सड़क हादसों की बात करें तो रोजाना कम से कम पांच सड़क हादसों में घायल लोग यहां पर पहुंचते हैं। इनमें से कई लोग गंभीर घायल होते हैं। महेंद्रगढ़ से मरीजों को पीजीआई ले जाने के लिए कई बार सरकारी एंबुलेंस नहीं होती तो मरीज को प्राइवेट एंबुलेंस में ले जाना पड़ता है।
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सतनाली के लिए नहीं है एंबुलेंस
आपको बता दें कि सतनाली कस्बे के नीचे आसपास के 25 गांव आते हैं। इन 25 गांवों पर सतनाली में ही सीएचसी है। बाकी गांवों एक दो गांव में पीएचसी है। लेकिन सतनाली सीएचसी में पिछले 6 महीनों से एक भी एंबुलेंस नहीं है। 2009 में प्रदेश सरकार ने सतनाली के लिए एक एबुंलेंस दी थी। एंबुलेंस की कमी के कारण लोगों को निजी एंबुलेंस का ही सहारा लेना पड़ता है। निजी एंबुलेेंस चालक मरीजों के परिजनों से महेंद्रगढ़ तक एक हजार रुपये की राशि वसूलते हैं। इससे ग्रामीणों को शारीरिक, मानसिक तथा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।
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