करीब 33 साल बाद रोडवेज अपने बस अड्डे की चाहर दीवारी कराएगा। जिसके लिए रोडवेज ने बस अड्डे की जमीन की पैमाइश कराई है। टोटल सर्वे मशीन के जरिए जमीन की रिकार्ड के अनुसार पैमाइश की गई है। करीब दो सप्ताह में पैमाइश की फाइनल रिपोर्ट अधिकारियों के पास पहुंचेगी। जिसके बाद रोडवेज अपनी जमीन को खाली कराएगा।
वर्ष 1987 में बस अड्डा बनाने के लिए राज्य परिवहन निगम ने जमीन का अधिग्रहण किया था। वर्ष 1988 में महेंद्रगढ़ बस स्टैंड की आधारशिला 1988 में रखी गई थी। छह वर्ष में बस स्टैंड लगभग आठ एकड़ जमीन पर बनकर तैयार हुआ था। 1995 में तात्कालिक मुख्यमंत्री भजन लाल ने बस स्टैंड का उद्घाटन किया था। उस समय में बस अड्डे की चाहर दीवारी नहीं कराई गई। बाद में रोडवेज की जमीन को लेकर कुछ विवाद हो गया। बस अड्डे के साथ लगती जमीन पर कुछ निर्माण हो गए। यहां दस से अधिक दुकानों का निर्माण हो चुका है। इन दुकानों के आगे की जमीन पर भी वकील किरोड़ीमल ने अपना दावा करते हुए 15 जुलाई 2020 को जमीन की जेसीबी से खोदाई शुरू करा दी थी। जिसे रोडवेज के कर्मियों ने पुलिस की मदद से रूकवाया था।अब 33 साल बाद रोडवेज बस अड्डे की बुधवार को पैमाइश की गई। रोडवेज महाप्रबंधक जीएम नवीन शर्मा ने मौके पर खड़े होकर टोटल सर्वे मशीन से पैमाइश करवाई है। जिसकी रिपोर्ट 10 से 15 दिन में आने की संभावना है।
इस टीम ने कराई पैमाइश
नारनौल डिपो के महाप्रबंधक नवीन शर्मा, वर्कर्स मैनेजर अमित यादव, एओ प्रवीण कुमार, गिरदावर नरेश कुमार थे। टीम ने टोटल सर्वे मशीन से पूरे बस स्टैंड परिसर की पैमाइश की। टीम ने इस पैमाइश के लिए करीब चार घंटे का समय लगाया। इस दौरान मोबाइल से वीडियोग्राफी भी की गई।
जमीन पर अवैध बनी दुकानों को थमाएंगे नोटिस
टीम ने पांच से छह दुकानें का हिस्सा बस अड्डे की जमीन पर बना हुुुआ पाया है। फाइनल रिपोर्ट के बाद रोडवेज ऐसे दुकानदारों को नोटिस थमाएगा। जिसके बाद जमीन को खाली कराया जाएगा। जमीन खाली होने के बाद रोडवेज अपनी जमीन की चारदीवारी कराएगा।