नारनौल। पेयजल व सीवर उपभोक्ताओं को बिल जमा कराने का अंतिम मौका 31 मार्च तक दिया गया है। बिल का भुगतान नहीं करने वाले उपभोक्ताओं के खिलाफ विभाग ने कार्रवाई करने का निर्णय लिया है।
पेयजल शुल्क का भुगतान उपभोक्ता अपने मोबाइल के माध्यम से गूगल पे, फोन पे, पेटीएम, भीम यूपीआई, सरल केंद्र, विभाग की वेबसाइट या कार्यालय में आकर कर सकते हैं।
कार्यकारी अभियंता जितेन्द्र हुड्डा ने बताया कि मुख्यालय के निर्देशानुसार शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों के उपभोक्ताओं के बिल जनरेट कर उनकी सूचना मोबाइल पर भेजी जा चुकी है। पिछले तीन महीनों से विभागीय टीमें घर-घर जाकर उपभोक्ताओं को पेयजल व सीवर के बिल भरने के लिए प्रेरित कर रही हैं।
31 मार्च के बाद जिन उपभोक्ताओं ने बिलों का भुगतान नहीं किया, उन पर सरचार्ज लगाने के साथ-साथ विभागीय कार्रवाई भी की जाएगी। इस विषय में 25 मार्च को आयोजित जिला जल एवं सीवरेज मिशन की बैठक में भी निर्णय लिया गया है।
शहरी उपभोक्ता पेयजल बिल भरने में आगे : ग्रामीण क्षेत्रों की अपेक्षा शहरी क्षेत्रों के उपभोक्ता पेयजल बिलों का भुगतान करने में आगे हैं। शहरी क्षेत्रों में विभाग के पास कुल 16,240 उपभोक्ता दर्ज हैं, जिन पर 116 लाख रुपये पेयजल व सीवर के बकाया थे, जिनमें से लगभग 75 लाख रुपये का राजस्व प्राप्त हो चुका है।
महेन्द्रगढ़ शहर में 15864 उपभोक्ताओं पर 114 लाख रुपये बकाया था, जिसमें से लगभग 64 लाख रुपये का राजस्व एकत्रित किया जा चुका है। कनीना शहर में 2380 उपभोक्ताओं पर 17 लाख रुपये बकाया था, जिनमें से लगभग 12 लाख रुपये जमा हो चुके हैं।
अटेली शहर में 2648 उपभोक्ताओं पर 19 लाख रुपये बकाया था, जिनमें से लगभग 9 लाख रुपये एकत्रित हो चुके हैं। वहीं नांगल चौधरी शहर में 2065 उपभोक्ताओं पर लगभग 15 लाख रुपये का बिल बकाया है, लेकिन अभी तक किसी भी उपभोक्ता ने बिल का भुगतान नहीं किया है।
ग्रामीण क्षेत्रों की बात करें तो नारनौल डिवीजन-1 में कुल 58,915 उपभोक्ता पर 265 लाख रुपये पानी के बकाया हैं, जबकि इस वर्ष मात्र 55 हजार रुपये ही राजस्व प्राप्त हुआ है।
नारनौल डिवीजन-3 (अटेली) में 42,210 उपभोक्ता पर 186 लाख रुपये बकाया हैं और केवल 2 लाख रुपये का राजस्व एकत्रित हुआ है। वहीं महेन्द्रगढ़ डिवीजन में 41,483 उपभोक्ता पर 179 लाख रुपये बकाया हैं और केवल 45 हजार रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ है।
जिलेभर में चलाया जा रहा है अभियान
जिला सलाहकार मंगतुराम सरसवा ने बताया कि पेयजल की बर्बादी रोकने और पेयजल व सीवर के बकाया बिलों की राशि एकत्रित करने के लिए शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में जनवरी माह से विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान का असर यह है कि उपभोक्ताओं ने अब अपने बिलों की अदायगी शुरू कर दी है, हालांकि ग्रामीण क्षेत्रों में प्रगति अभी भी धीमी है।