फोटो संख्या:67- बाबा जयराम दास मंदिर में श्रीमद्भागवत कथा में स्वामी श्रीरामप्रपन्नाचार्य महारा
महेंद्रगढ़। मानव योनि हमें धर्म संग्रह करने के लिए मिली है, धर्म ही जीव के साथ जाता है। अधर्म से ही व्यक्ति के लोक और परलोक बिगड़ते हैं। जीवन में हमें धर्म का साथ कभी नहीं छोड़ना चाहिए। यह प्रवचन बाबा जयरामदास धर्मशाला में बुधवार शाम को श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन स्वामी श्रीराम प्रपन्नाचार्य महाराज आचार्य कुटी वृंदावन धाम ने व्यक्त किए।
कथा में नारद के पूर्व जन्म, कुंती स्थिति, भीष्म स्थिति, कलयुग के दिए पांच सिद्धांत की भी व्याख्या विस्तार से की। उन्होंने कथा के दौरान बच्चों के लिए उनके माता-पिता को सीख देते हुए कहा कि छोटे बच्चों व युवाओं को बिगाड़ने में मोबाइल का अहम योगदान है। बच्चों को मोबाइल से दूर रखना चाहिए। उन्होंने बताया कि मोबाइल के कारण बच्चे अब एकांतवासी होने लग गए हैं। इससे घर टूटने तक की मुसीबत आ खड़ी होती है।
इसका मुख्य अहम कारण मोबाइल फोन ही बन रहा है। उन्होंने उपस्थित श्रद्धालुओं को बताया कि वे अपने बच्चों को संस्कारी बनाने पर जोर दें। जिस घर में माता-पिता, दादा-दादी, भाई-बहनों के बीच आपसी प्रेम नहीं होता वह घर, घर नहीं होता। परिवार में आपसी प्रेम होना अत्यंत जरूरी है। उन्होंने कहा कि जहां प्रेम होता है वहां सौहार्द का वातावरण हमेशा बना रहता है। रमेश सैनी नगर पालिका के चेयरमैन मुख्य यजमान रहे। बलवान फौजी समाज सेवी विशिष्ट अतिथि के तौर पर मुख्य रूप से उपस्थित रहे।