फोटो 8अग्रवाल सभा में कथा वाचक अनिरुद्धाचार्य महाराज प्रवचन करते हुए।संवाद
नारनौल। कथा वाचक अनिरुद्धाचार्य महाराज ने कहा कि जो भगवान के बनाए विधान को चैलेंज करता है, उसे दंड भोगना पड़ता है। इसलिए भगवान ने जो दिया है, उससे खुशी से अपनाओ। वह सोमवार रात अग्रवाल सभा भवन में आयोजित गुरु पूर्णिमा महोत्सव में बोले।
राजेश्वरी परिवार की ओर से आयोजित महाेत्सव में कहा कि त्रेता युग में कर्ण ने स्वार्थ से वशीभूत होकर भगवान के बनाए गए विधान को चैलेंज किया। कर्ण ने दोस्त दुर्योधन का साथ दिया और द्रौपदी का जब चीरहरण हो रहा था तो उसको मना करने के बजाय दोस्त का साथ दिया। हास्य बनाया।
इसका नतीजा उसे भुगतना पड़ा। वह बहुत ही बुरी मौत मारा गया। इस युग 2025 में सोनम जैसी महिला ने प्रेमी से अपने पति की हत्या करवाई। उसने विधि के बनाए विधान को चैलेंज किया। विधि ने तो राजा को उसका पति बनाया था, लेकिन उसने प्रेमी का साथ दिया और पति को मरवा दिया। इसके बाद अब उसका जीवन नरक हो गया है। वह ही नहीं, उसने अपने पूरे परिवार का जीवन नरक बना दिया। उसका भाई भी किसी के सामने नजर उठाकर नहीं देख सकता।
उन्होंने कहा कि लोग बेटों पर विश्वास रखते हैं। और भगवान से विश्वास खत्म कर लेते हैं। जब बेटा पैदा होता है तो सोचते हैं कि वह बुढ़ापे में उसका सहारा बनेगा। इसलिए वे सबकुछ छोड़कर बेटे के लालन-पालन और उसको बड़ा करने में लग जाते हैं, लेकिन बड़ा होने के बाद उनका बेटा उनके विश्वास को तोड़ देता है। इसके बाद लोग भगवान की शरण में आते हैं। भगवान पर विश्वास करते हैं। यदि वह पहले ही बेटे से ज्यादा भगवान पर विश्वास करते तो उनके साथ ऐसा नहीं होता।
अंत में आचार्य ने इतनी कृपा सांवरे बनाए रखना भजन सुनाकर अपनी कथा का समापन आरती के साथ किया। इस मौके पर महंत गुरु प्रसाद व भक्तों को राम कथा का रसपान करवा रहे आचार्य रोहित रिछारिया भी मौजूद रहे।