नारनौल। प्रदेश में भाजपा सरकार के कार्यकाल का एक साल पूरा हो गया लेकिन इस एक साल में जिले के हालात में काई बदलाव नहीं आया। पिछड़ेपन का कलंक अब भी बरकरार है, कई उम्मीदें तो जगी लेकिन उन पर काम सिरे नहीं चढ़ा। एक साल में न तो सड़कों की सूरत बदली न ही विकास की कोई नई योजना लागू हुई। वहीं लोगों को महंगाई और सताने लगी है। प्याज व दाल ने जहां लोगों का स्वाद बिगाड़ा है। वहीं बिजली के बढ़े दामों ने लोगों को आंदोलन करने को मजबूर कर दिया। नारनौल-महेंद्रगढ़ तथा महेंद्रगढ़-दादरी रोड को बेशक सरकार ने नेशनल हाईवे घोषित कर दिया, लेकिन इनकी हालत में कोई सुधार नहीं आया है। वहीं नहरी पानी की समस्या को लेकर किसान आंदोलनरत हैं। इसमें सुधार करने के लिए सरकार ने 143 करोड़ रुपये से पंप हाउसों और नहरों को ठीक करने की जल प्रबंध नामक योजना जरूर शुरू की है। इस पूरा होने में भी ढाई से तीन साल का समय लग जाएगा। शहरों में लोगों को पीने के पानी का भी टोटा बना हुआ है। नारनौल की सड़कों की हालत तो बहुत ही खराब है। बिजली समस्या भी जस की तस ही है। इस समस्या का भी कोई समाधान नहीं हो पाया है।
- पेंडिंग प्रोजेक्ट भी नहीं हुए पूरे
जिला में ऐेसे अनेक प्रोजेक्ट हैं, जो अभी तक पेंडिंग पड़े हैं। वे प्रोजेक्ट कब पूरे होंगे, इस बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता। नारनौल में नई चारा, सब्जी और अनाज मंडी का निर्माण कार्य पूरा होने के बाद यहां अभी तक मंडी स्थापित नहीं की गई है। नारनौल में बनने वाला आयुर्वेदिक मेडिकल कालेज भी अभी नहीं बना है। रायमलीकपुर से होते हुए भिवानी जिला के बौंद तक बनने वाला राजमार्ग भी अभी पेंडिंग है। नारनौल के गांव बाछौद में बनने वाला एयरो स्पोर्टस सेंटर भी अभी नहीं बन पाया है। इसके अलावा कई अन्य ऐसे कार्य हैं, जो पूर्व की सरकार शुरू करके गई थी, मगर वे अभी तक पूरे नहीं हो पाए हैं।
नए बाईपास की उठने लगी है मांग
नई सरकार बनने के बाद एक बाईपास का निर्माण पूरा हुआ है है। हुड्डा सरकार में शुरू हुआ केवल यही एक ऐसा कार्य है, जो इस सरकार में समय रहते पूरा हो पाया है। वहीं इसके निर्माण होने के बाद लोगों को काफी राहत भी मिली है। वहीं अब नए बाईपास की मांग भी उठने लगी है। सीएम की 21 अक्तूबर को हुई नारनौल रैली में पूर्वी बाईपास की मांग विधायक ने ही रखी। हालांकि यह मांग बहुत पुरानी है और इस पर हुड्डा सरकार में सर्वे भी हुआ था।
- एक साल में छाया लॉजिस्टिक हब का मुद्दा
सरकार के इस एक साल में लॉजिस्टिक हब का मुद्दा छाया रहा। शुरूआत में ही अटेली और नांगल चौधरी के विधायक ने इस ओर कदम उठाया। बावल में भूमि के अधिग्रहण जैसे ही रद हुआ। वैसे ही इन विधायकों ने अपने क्षेत्र में इसको लाने की मांग की तथा कई बार सर्वे भी हुआ। इससे यहां के लोगों में आस जगी थी नई सरकार में यह सौगात अगर जिला के लोगों को मिल जाती है तो जिला में विकास ही विकास हो जाएगा। मगर एक अब छह माह से यह मुद्दा गायब हो गया है।
- दयनीय है सड़कों की हालत
सरकार ने इस एक साल में जिला को दो नेशनल हाईवे दिए। इन हाइवे में से एक पहले से ही कांग्रेस सरकार के शासनकाल से ही मंजूर था, वहीं दूसरा भी 10 साल पहले सेना के लिए दिल्ली से बीकानेर तक रोड बनाने की बात चली थी, जो बाद में ठंडे बस्ते में चली गई थी, अब भाजपा सरकार ने इसे फिर से नए नाम से नेशनल हाईवे घोषित किया है। यहां का मुख्य नारनौल-महेंद्रगढ़-दादरी मार्ग बेहाल है। अन्य कई अप्रोच रोडों की हालत बहुत ही खस्ता है।
- नहीं मिल रहा पानी, खेती संकट में
भाजपा नेताओं ने एक साल पहले वोट मांगते समय यहां की नहरों में भरपूर पानी पहुंचाने का वायदा किया था, मगर यह वायदा पूरा नहीं हो पाया। हालांकि पानी के फेरों में मामूली बढ़ोतरी बेशक हुई है, मगर इससे राहत की कोई बात नहीं मिली। इसको देखते हुए सरकार ने अब नहरों, पंप हाउसों आदि की मरम्मत के लिए 143 करोड़ रुपये की योजना का शुभारंभ किया है, मगर इस योजना के पूरा होने में करीब तीन साल लग जाएंगे।
- इस सरकार में भी महंगाई की मार
कांग्रेस सरकार से लोग इसलिए खफा थे कि कांग्रेस राज में महंगाई बहुत अधिक हुई, मगर अब भाजपा सरकार में भी महंगाई बढ़ी है। भाजपा सरकार में प्याज 80 रुपये किलो, दाल 130 रुपये से 150 रुपये किलो तथा बिजली के बिलों में भारी वृद्धि की है। जिससे आम जनता परेशान है।
- बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना सही
सरकार की बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ योजना को लोग सही मान रहे हैं। लोगों का कहना है कि इस योजना से लोगों की सोच में बदलाव आया है। वहीं कन्या भ्रूण हत्या में भी काफी हद तक कमी आई है। चिकित्सकों पर शिकंजा कसा है। वहीं लड़कियों को शिक्षित करने के लिए लोग सामने आने लगे हैं।
- महिला थाने की सराहना
लोगों ने महिला थानों की भी सराहना की है। अब इन थानों में महिलाएं अपनी बात को बेहिचक रख रही हैं। इससे महिलाओं पर होने वाले अपराध में अंकुश आएगा। महिला थाने में दो माह में 200 से अधिक शिकायतें भी आई हैं।
सरकार का केवल चेहरा बदला है। लोगों को नई सरकार से उम्मीदें थी, मगर वे पूरी नहीं हो पाई हैं। दाल और प्याज के रेट बढ़ गए। इससे लोग परेशान हैं। - प्रवेश कुमार
गत कांग्रेस सरकार की तरह इस सरकार में भी रोडों का बुरा हाल है। शहर ही नहीं मुख्य मार्ग भी टूटे हुए हैं। जिससे लोग परेशान हैं। बिजली के बिल भी बढ़ गए। इससे महंगाई बढ़ी है। - प्रवीण कुमार
बिजली पानी की समस्या अभी भी लोगों के सामने बनी हुई है। लोगों की सोच थी कि समस्या का समाधान होगा, उल्टे बिजली बिल बढ़ा दिए गए। बरसात न होने के कारण दाल व अन्य खाद पदार्थों के दाम बढ़ गए। जिन पर सरकार कंट्रोल नहीं कर पा रही है। - सुमित, व्यापारी
लोगों को नई सरकार से बहुत आशा थी, मगर एक साल में काई नया काम नहीं हुआ। जिससे लोगों को काफी परेशानी हो रही है। - अतुल कुमार, व्यापारी