फोटो नंबर- 13अधिकारियों के साथ बैठक करती सीजेएम नीलम कुमारी।स्रोत-प्रशासन
नारनौल। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा एडीआर सेंटर में पुलिस अधिकारियों व लीगल एड डिफेंस काउंसिल के लिए कार्यशाला हुई। आयोजन सीजेएम नीलम कुमारी की अध्यक्षता में किया गया।
सीजेएम नीलम कुमारी ने कहा कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 एक भारतीय अधिनियम है जो आपराधिक प्रक्रियाओं से संबंधित कानूनों को एकीकृत और संशोधित करता है। इसके तहत सात साल या उससे अधिक के कारावास वाले अपराधों के लिए फॉरेंसिक जांच अनिवार्य की गई है। इसमें सभी परीक्षण और कार्रवाई इलेक्ट्रॉनिक रूप से की जा सकती हैं। इस अवसर पर डिप्टी लीगल एड काउंसिल जितेंद्र गुर्जर सहित पुलिस अधिकारी व पैनल अधिवक्ता उपस्थित रहे।
सीजेएम नीलम कुमारी ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 (बीएनएसएस) के तहत गिरफ्तारी पूर्व व गिरफ्तारी पश्चात तथा जांच इन्वेस्टिगेशन की प्रक्रिया के बारे में बताते हुए कहा कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (बीएनएसएस) एक भारतीय अधिनियम है जो आपराधिक प्रक्रियाओं से संबंधित कानूनों को एकीकृत और संशोधित करता है, और इसने 1 जुलाई, 2024 को दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (सीआरपीसी) को प्रतिस्थापित किया है। इसके तहत, सात साल या उससे अधिक के कारावास वाले अपराधों के लिए फोरेंसिक जांच अनिवार्य की गई है। इसमें सभी परीक्षण और कार्यवाही इलेक्ट्रॉनिक रूप से की जा सकती हैं, और फरार घोषित अपराधियों की अनुपस्थिति में भी मुकदमा चलाया जा सकता है।
इस अवसर पर डिप्टी लीगल एड काउंसिल जितेंद्र गुर्जर के अलावा पुलिस अधिकारी व पैनल अधिवक्ता मौजूद थे।