मंडी अटेली। गांव बिहाली के प्रहलाद सिंह की कहानी इंसानियत और सेवा की मिसाल है। 3 मार्च 1970 को जन्मे वे 56 वर्ष के हैं और पूरी तरह सक्रिय हैं। 1992 में गुरुग्राम में सड़क हादसे के दौरान घायल व्यक्ति को खून की जरूरत पड़ी और उन्होंने पहली बार रक्तदान किया।
इसके बाद प्रहलाद सिंह ने रक्तदान को अपने जीवन का संकल्प बना लिया। पिछले 33 वर्षों में वे 36 बार रक्तदान कर चुके हैं।
उनका मानना है कि हर यूनिट खून किसी की जिंदगी बचा सकती है, इसलिए यह सबसे बड़ा दान है।
वे सुबह 3:30 बजे उठते हैं योग और मॉर्निंग वॉक से दिन की शुरुआत करते हैं। नियमित रक्तदान से शरीर स्वस्थ रहता है और कमजोरी नहीं आती। उनका ब्लड ग्रुप ओ पॉजिटिव है जिससे वे कई मरीजों की मदद कर पाते हैं। उन्होंने अपने साथियों को भी रक्तदान के लिए प्रेरित किया है।
उनकी यह यात्रा बताती है कि एक छोटा फैसला भी कई जिंदगियां बचा सकता है। बिना नाम और शोहरत की चाह के वे लगातार समाज सेवा कर रहे हैं। उनकी कहानी हर युवा को संदेश देती है कि असली हीरो वही है जो दूसरों के लिए जीता है।